भाजपा का मानना है कि सरकार ने अलगाववादियों से बातचीत का रास्ता खोला है, आतंकियों से नहीं। एक ओर मसर्रत आलम की रिहाई का विरोध और दूसरी ओर अलगाववादियों से बातचीत के संबंध में नौशेरा के भाजपा विधायक रविंद्र रैना ने कहा कि सरकार ने अलगाववादियों से बातचीत का रास्ता खोला है।
जहां तक मसर्रत आलम का सवाल है, वह अलगाववादी नहीं, बल्कि आतंकी है। उसकी रिहाई का विरोध भाजपा करती रहेगी। भाजपा किसी भी शर्त पर राष्ट्रीय अखंडता और भाईचारे पर आंच नहीं आने देगी। नेशनल कांफ्रेंस के एक विधायक द्वारा प्रधानमंत्री के लिए गलत शब्दों का उपयोग किए जाने का रैना ने जमकर विरोध किया।
रैना ने कहा कि इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विरोध जताया गया है। जब तक उक्त विधायक सदन से माफी नहीं मांगता, भाजपा विधायक उसका विरोध करते रहेंगे।
रैना ने स्पष्ट कहा कि रियासत की सुरक्षा के लिए आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर (अफस्पा) एक्ट जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी रियासत के कई हिस्सों में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे। ऐसे में अफस्पा हटाने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
पाकिस्तानी रिफ्यूजियों पर हुआ हंगामा
वेस्ट पाकिस्तानियों के मुद्दे पर एक भाजपा विधायक और स्वतंत्र एमएलए इंजीनियर रशीद अहमद के बीच बहस हो गई। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान इंजीनियर रशीद ने कहा कि पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को वापस उनके देश भेज दें। आप उनका पुनर्वास क्यों करना चाहते हैं। लेकिन आप (सरकार) ऐसा नहीं कर पाओगे।
इस दौरान इंजीनियर के अध्यक्ष की कुर्सी के समक्ष पहुंच जाने पर भाजपा विधायक रैना ने उनका विरोध करते हुए कहा कि पीओके जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, इसलिए उन्हें वापस क्यों भेजा जाए। उन्हें पाकिस्तान वापस भेजने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
बाद में इंजीनियर ने विधानसभा के बाहर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को सेटल करने का बिल लाया गया तो करना से कठुआ तक रियासत में आग लग जाएगी। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को आर्थिक मदद करें और उन्हें वापस भेजें।
उस्मान और इंजीनियर में जमकर हुई तकरार
विधानसभा में लंच के बाद हुए सत्र में बांडीपोरा से कांग्रेसी विधायक उस्मान मजीद और स्वतंत्र विधायक इंजीनियर रशीद के बीच जमकर तकरार हुई।
कांग्रेसी विधायक ने उन लोगों (हुर्रियत) से बातचीत का विरोध किया, जिन्होंने विधानसभा चुनाव के बायकाट की अपील की थी। इस पर इंजीनियर रशीद भड़क गए।
उनका कहना था कि हुर्रियत भी रियासत का अंग है और उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इंजीनियर ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस ने ही उन पर पहले गोलियां चलाईं, जिससे हालात बिगड़े।