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केंद्र को भेजी गई मसर्रत आलम की कुंडली

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हुर्रियत लीडर अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई पर राज्य सरकार की दो रिपोर्ट से असंतुष्ट केंद्र सरकार की ओर से मांगी गई जानकारी पर राज्य सरकार ने तीसरी रिपोर्ट भी भेज दी है। इसमें मसर्रत पर लंबित सभी मामलों का ब्योरा है। साथ ही मामले किस स्थिति में हैं, इसका जिक्र है।
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रिपोर्ट में 2010 की घटना से लेकर सभी मामलों का सिलसिलेवार जिक्र है। गृह विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मसर्रत के खिलाफ लंबित मामलों का ब्योरा जुटा लिया गया है। ताजा रिपोर्ट में अलग-अलग मामलों की बिंदुवार रिपोर्ट दी गई है। इसमें 2010 की घटना का भी जिक्र है, जिसमें लगभग सौ लोग मारे गए थे।

इसके साथ ही पत्थरबाजी और अन्य घटनाओं का भी जिक्र है। मसर्रत पर कुल 27 मामले लंबित बताए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि मसर्रत की रिहाई के बाद घाटी के ताजा हालात का भी जिक्र है। केंद्र को यह बताने की भी कोशिश की गई है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
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मसर्रत जैसे बाकी कैदी भी रिहा हों: कांग्रेस

गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र को रिपोर्ट भेजकर ताजा हालात की जानकारी दे दी गई है। स्थिति पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। मसर्रत की पल-पल की गतिविधियों पर नजर है। कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या किसी भी स्थिति में उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।

ज्ञात हो कि संसद तथा राज्यसभा में सरकार तथा भाजपा की किरकिरी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। साथ ही मसर्रत पर निगरानी रखने को कहा था। अब कांग्रेस ने मसर्रत की तरह सभी बंदियों को रिहा करने की मांग की है।

कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने शनिवार को श्रीनगर में कहा कि मसर्रत आलम ही क्यों, बाकी सभी सियासी या अन्य कैदियों, जिनकी जेलों में अवधि पूरी हो गई हो, को रिहा किया जाए। हालांकि, राज्य सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि रियासत में एक भी राजनीतिक बंदी नहीं है।
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