कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम पर एक बार फिर पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) लगाने की कवायद चल रही है। यदि ऐसा होता है तो उस पर 31वीं बार पीएसए लगेगा। 30 दिसंबर को जम्मू की अदालत ने उस पर लगे पीएसए को खारिज कर दिया गया था, लेकिन रियासत के शीर्ष खुफिया अधिकारियों ने उसे अमन शांति के लिए बड़ी चुनौती बताया है।
30 दिसंबर को पुलिस ने जेल से निकलते ही उसे अन्य केस में उठा लिया था। एक जनवरी को उसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे सात जनवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया था।
हालांकि उसका रिमांड वीरवार को समाप्त हो रहा था, लेकिन बुधवार की देर शाम उसे अन्य मामले में ट्रांसफर आफ कस्टडी के तहत उठाने के बाद कश्मीर संभाग की पुलिस उसे अपने साथ ले गई। बताया जाता है कि जम्मू से ले जाने के बाद मसर्रत को फिलहाल हुमहामा (जिला बडगाम) में रखा गया है।