भारत प्रशासित कश्मीर में कानून व्यवस्था पर संकट पैदा होने की आशंका के कारण प्रमुख अलगाववादी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। साथ ही, 'शहीदों की मज़ार' की ओर जाने वाली प्रस्तावित साझा रैली को रोकने के लिए रास्तों की नाकाबंदी भी कर दी गई है।
पुराने श्रीनगर के ख्वाज़ा बाज़ार स्थित 'शहीदों की मज़ार' वो जगह है जहां साल 1931 में कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह के खिलाफ हुए विद्रोह के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए 20 से अधिक लोगों की कब्रें हैं।
13 जुलाई का दिन अकेला ऐसा दिन है जिसे भारत-समर्थक और भारत-विरोधी 'राष्ट्रीय शहीद दिवस' के रूप में मनाते रहे हैं। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया, 'शहीद दिवस के दौरान वहां अलगाववादियों की मौजूदगी से क़ानून-व्यवस्था पर संकट पैदा हो सकता है।
शांति बनाए रखने के लिए हमने उन्हें घरों में ही बने रहने का निर्देश दिया है।'जवाब में अलगाववादी नेताओं ने इसे सरकार का 'अलोकतांत्रिक और तानाशाही रवैया' बताया है।