बिना निवेश के राज्य को मिल रहे हैं कई फायदे
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एनएचपीसी द्वारा संचालित पनबिजली परियोजनाओं को राज्य सरकार को लौटाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है। राज्य से उठाई जा रही प्रोजेक्ट वापसी की मांग को सिरे से खारिज करते हुए जहां केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने इसे नीतिगत सीमाओं का तर्क देते हुए नामुमकिन बताया है, वहीं राज्य के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू दावा कर रहे हैं कि प्रोजेक्ट वापसी के लिए केंद्र से बातचीत चल रही है।
ऐसे में एनएचपीसी के पावर प्रोजेक्टों को लेकर फिर से असमंजस की स्थिति बन गई है। इस सब के बीच यदि प्रोजेक्ट वापसी को मुमकिन मान भी लिया जाए तो रियासत के लिए एनएचपीसी की विशालकाय परियोजनाओं का संचालन टेढ़ी खीर होगा। खासकर सलाल परियोजना जिसे खुद एनएचपीसी एक सिक चाइल्ड मानती है।
एनएचपीसी के पास रहते यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार के लिए नफे का सौदा साबित हो रहा है। अधिकारिक आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 690 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट से राज्य को 12 फीसदी बिजली मुफ्त मिलती है। इसके अलावा राज्य को प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली 25 फीसदी बिजली बज बार रेट पर मिलती है।