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शाह और महबूबा की मुलाकात में तय होगी सरकार गठन की तारीख

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुलाकात में जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन की तारीख तय हो सकती है। महबूबा 22 फरवरी को दिल्ली आ रहीं हैं।
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अमित शाह से मुलाकात से पहले उनकी कुछ मंत्रियों और भाजपा महासचिव राम माधव से बातचीत हो सकती है। इस बीच, पीडीपी नेता और राज्य के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू दिल्ली पहुंच चुके हैं।

पीडीपी सूत्रों के मुताबिक राम माधव से अनौपचारिक बातचीत चल रही है, लेकिन, टेबल पर भाजपा नेताओं से औपचारिक बातचीत के लिए अनुकूल माहौल की प्रतीक्षा है। फिलहाल जेएनयू विवाद के चरम पर होने के कारण पीडीपी जल्दबाजी नहीं करना चाहती।
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जेएनयू विवाद के कारण दिल्ली में कुछ कश्मीरी छात्रों से पूछताछ हुई है। जेएनयू के स्कॉलर एसए रहमान गिलानी पर मुकदमे के बाद कश्मीर में सियासी गरमी बढ़ी है। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस मुद्दे पर आंदोलन की बात कही है।

नेशनल कांफ्रेंस भी इस मुद्दे को तूल दे रही है। घटना को कश्मीरी छात्रों के उत्पीड़न के रूप में प्रचारित किया जाने लगा है। लिहाजा, इस माहौल में पीडीपी जल्दबाजी से बचना चाहती है।

पीडीपी और भाजपा नेताओं के बीच बातचीत संभव

सूत्रों के मुताबिक संसद सत्र शुरू होने के बाद पीडीपी और भाजपा नेताओं के बीच बातचीत संभव है। गठबंधन एजेंडे में एनएचपीसी के दुलहस्ती और उड़ी पावर प्रोजेक्टों की वापसी का मुद्दा शामिल है।

पीडीपी इसके लिए समय सीमा तय करने पर जोर दे रही है। लिहाजा, महबूबा की केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात होगी। गोयल ने पहले इन प्रोजेक्टों की वापसी से इनकार कर दिया था। बदली परिस्थितियों में इस मुद्दे को वर्क आउट करने की कोशिश के लिए बातचीत संभव है।

श्रीनगर और जम्मू में एम्स के मुद्दे पर महबूबा की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात संभव है। पीडीपी की ओर से जम्मू और श्रीनगर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करने की भी मांग रखी गई है। एजेंडे को लागू करने के लिए एक कमेटी के गठन की संभावना है।
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सेना के कब्जे से भवनों को खाली कराए जाने की तिथि का एलान संभव

गठबंधन एजेंडा को लागू करने के लिए समय सीमा तय करने के क्रम में सेना के कब्जे से कुछ भवनों को खाली कराए जाने की तिथि का एलान संभव है। सेना ने जम्मू-कश्मीर में अब तक 1474 भवन और 56 बंकर खाली किए हैं।

जम्मू-कश्मीर सरकार के रिकार्ड के अनुसार अब भी सेना के कब्जे में 1648 भवन हैं। इनमें 1307 निजी भवन, 278 सरकारी भवन और पांच सिनेमाहाल शामिल हैं। सेना के कब्जे में 21337 एकड़ जमीन भी है जिसे पीडीपी खाली कराने की मांग करती रही है।

सरकार गठन के लिए अनुकूल माहौल की कोशिश के तहत महबूबा की इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से भी मुलाकात की योजना है। दरअसल, पीडीपी अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए यह दिखाना चाहती है कि उसने कुछ हासिल कर लिया है और बाकी एजेंडे पर ठोस आश्वासन मिल गया है।
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