देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर के नए उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रदेश के लोगों को संबोधित किया। उप-राज्यपाल ने प्रदेश के लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकानाएं दीं। उन्होंने कहा कि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत को विदेशी अत्याचार के प्रकोप से मुक्त करने के लिए बलिदान दिया। यह शुभ दिन हमें उनके योगदान के प्रति अपनी श्रद्धांजलि और कृतज्ञता पेश करने का अवसर देता है। हमें उनके संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
इसके अलावा, यह दिन हमें अपने देश की स्वतंत्रता और अखंडता को बनाए रखने और उसे संरक्षित करने के हमारे संकल्प को नवीनीकृत करने के लिए प्रेरित करता है। इस दिन हमें उस कार्य को प्रतिबिंबित करना चाहिए, जिससे गरीबी, बीमारी और अशिक्षा मुक्त समाज का निर्माण हो सके।
जम्मू और कश्मीर हमेशा से सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भारत के अस्तित्व का एक अभिन्न अंग रहा है। जम्मू-कश्मीर में हर धर्म और परंपरा को आत्मसात करने और उसे स्वीकार करने की परंपरा है। हालांकि इसकी सांस्कृतिक पर कई बार हमले किए गए लेकिन फिर भी इसके अस्तित्व को समाप्त करने में सफल नहीं रहा है।
महात्मा गांधी द्वारा दिखाया गया अहिंसा का मार्ग भारत की स्वतंत्रता आंदोलन का मार्गदर्शक रहा। अहिंसा का यह मार्ग हमेशा जम्मू और कश्मीर के लोकाचार के अनुरूप रहा है। देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार लोगों ने इस भूमि को भी सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास किया, लेकिन इस भूमि के लोगों ने हमेशा इस कट्टर विचारधारा को दृढ़ता से खारिज किया है।
जम्मू और कश्मीर के लोगों ने विभाजन के सांप्रदायिक दंगों से खुद को अलग कर रखा और राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को बनाए रखने में पूरी तरह से जुटे रहे।
स्वतंत्रता के संघर्ष में जम्मू-कश्मीर के लोगों के योगदान और भूमिका से हम सभी परिचित हैं। इस भूमि के असंख्य नायकों ने भारत माता की सेवा में अपना बलिदान दिया है।
इस भूमि ने महावीर चक्र पुरस्कृत शहीद ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह जैसे बहादुर को जन्म दिया है। इतिहास गवाह है 1947 में जब आक्रमणकारियों ने उरी सेक्टर की घेराबंदी की, तो ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह दुश्मन की राह में चट्टान की तरह खड़े रहे। अपनी अंतिम सांस तक उन्होंने जम्मू और कश्मीर की जमीन को दुश्मन से बचाया।
इसी तरह
हमें ब्रिगेडियर उस्मान की वीरता याद आती है जिन्होंने दुश्मन का सामना करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अंतिम शब्द थे, "हो सकता है मैं मर रहा हूं, लेकिन जिस जमीन के लिए हम लड़ रहे हैं वह दुश्मन के हाथों में नहीं पड़नी चाहिए।"
जम्मू और कश्मीर ऋषि कश्यप की भी भूमि है और पैगंबर मोहम्मद की भूमि भी है। इस भूमि ने आत्मज्ञान की तलाश में आए गुरु नानक की मेजबानी भी की है और
गौतम बुद्ध के दर्शन को भी समायोजित किया है। हम जम्मू और कश्मीर की धार्मिक समावेशिता की प्राचीन परंपरा से बहुत कुछ सीख सकते हैं और हम इस परंपरा को नवीनीकृत और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जम्मू और कश्मीर ने हिंदू धर्म और सूफी इस्लाम के बीच सांस्कृतिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए एक अमूल्य योगदान दिया है। इस भावना के साथ मैं जम्मू और कश्मीर के युवाओं और छात्रों से एक विशेष अपील करना चाहता हूं।
युवाओं के पास सबसे बड़ी ताकत परिवर्तनकारी कल्पना की शक्ति है। यह आपकी सबसे बड़ी ताकत है। हम अक्सर यह कहावत सुनते हैं कि परिवर्तन एकमात्र स्थिर चीज है और कोई भी इसकी सत्यता से इनकार नहीं कर सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि इस परिवर्तन के लिए एक और संबद्ध सत्य है जिसे हम सभी स्वीकार करते हैं और वह है पूरे इतिहास में युवा-शक्ति सभी परिवर्तनों की अग्रदूत रही है।