जम्मू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की पूर्व प्रोफेसर रेखा चौधरी ने बताया कि अनंतनाग-राजोरी सीट पर पहली बार पुंछ और राजोरी जिले की सात विधानसभा सीटों को जोड़ा गया है। पुंछ-राजोरी में महिलाओं के कई मुद्दे हैं, जिनमें शिक्षा सबसे अहम है। अब पहाड़ियों को एसटी का दर्जा और एसटी के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित होने जैसे बड़े मुद्दों में महिलाओं के मुद्दे दब गए हैं।
प्रदेश की 18 विधानसभा सीटें इस संसदीय सीट में आती हैं, जिसमें से 11 विस सीटें कश्मीर संभाग की जबकि सात जम्मू संभाग की हैं। जम्मू संभाग में पुंछ और राजोरी जिले की सुंदरबनी और कोटरंका विस सीट को छोड़ दें तो अन्य सभी विधानसभा सीटें इसमें आती हैं। कश्मीर संभाग की अनंतनाग, कुलगाम और शोपियां जिले की जेनपूरा सीट इसमें आती है।
अनंतनाग सीट पर पीडीपी-नेकां का रहा है दबदबा
पूर्व की अनंतनाग लोकसभा सीट पर दो दशक तक नेकां और पीडीपी का दबदबा रहा है। 1998 में मुफ्ती मोहम्मद सैयद ने कांग्रेस की टिकट से इन सीट पर जीत हासिल की थी। 2004 में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती जबकि 2009 में नेकां के महबूब बेग ने जीत हासिल की। 2014 में फिर पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और 2019 में नेकां के हसनैन मसूदी ने जीत हासिल की। इस बार इस सीट पर जीत के लिए राजनीति पार्टियों को नए समीकरण बिठाने होंगे।