अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण से आधी आबादी में जोरदार उत्साह है। उनका मानना है कि अब उन्हें भी अपनी क्षमता दिखाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। ऐसे में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ाने के लिए पार्टी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीति में महिलाएं लंबे समय से अपना योगदान दे रही हैं।
लोकसभा चुनाव का एलान होने में चंद दिन रह गए हैं। अब से ही महिलाएं अपनी सहभागिता सुनिश्चित कराने के लिए आगे आ गई हैं। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में इनकी कितनी सहभागिता होगी, यह तो सभी दलों की ओर से प्रत्याशियों का नाम घोषित होने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन भाजपा, कांग्रेस, नेकां, पीडीपी, अपनी पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने अपने-अपने महिला विंग को सक्रिय कर दिया है।
ddc election Jammu and Kashmir Voting (File)
- फोटो : बासित जरगर
पुलवामा एकमात्र ऐसा जिला जहां महिला वोटर अधिक
जम्मू कश्मीर में पुलवामा एकमात्र ऐसा जिला है जहां महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से अधिक है। जिले में महिला वोटर पुरुषों से 2726 अधिक हैं। यहां कुल वोटर 403795 हैं। इनमें 203255 महिलाएं व 200529 पुरुष हैं। अन्य जिलों में पुरुष वोटर महिलाओं से अधिक हैं।
हर जिले में पिंक बूथ
लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में पिंक बूथ बनाए जाएंगे। यहां मतदान में नियुक्त सभी कर्मचारी महिलाएं ही रहेंगी। यह प्रयास है कि महिलाओं को अच्छे माहौल का अहसास कराया जाए। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की ओर से इसके लिए महिला कर्मियों को चयनित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
डीडीसी चुनाव में भी बढ़ चढ़कर भागीदारी
अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2020 में डीडीसी चुनाव हुए थे। इसमें बंपर वोटिंग हुई। 98 फीसदी से अधिक मत पड़े। लोकतंत्र के इस पर्व में महिलाओं ने भी जमकर आहुति डाली। पांच से अधिक डीडीसी पर महिलाओं का कब्जा रहा है।
पत्नी, बेटी होने का टैग मिटाकर अपने बलबूते पर लोकतंत्र की चौखट तक पहुंचेंगीं
महिलाएं सक्षम और क्षमतावान हैं। जब अवसर कम थे तब भी वे राजनीति में बेहतर कर रही थीं। वोट करने से लेकर चुनाव प्रचार तथा चुनाव लड़ने में भी उनकी भूमिका रही है। अब महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण लोकसभा और विधानसभा में मिल गया है। इसका असर 2029 के चुनाव में दिखेगा।
अब हर महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाना होगा कि दिल्ली तथा विधानसभाओं में भी उनकी आवाज के लिए जगह है। अब महिलाओं को अपनी क्षमता के आधार पर राजनीतिज्ञ का पत्नी, बेटी होने का टैग मिटाकर अपने बलबूते पर लोकतंत्र की चौखट तक पहुंचना है। - प्रो. विश्व रक्षा, अध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग व निदेशक- महिला अध्ययन केंद्र -जम्मू विश्वविद्यालय
अब हर क्षेत्र में भागीदारी चाहती हैं महिलाएं
महिलाएं आज बहुत जागरूक हैं। अब वह हर क्षेत्र में भागीदारी चाहती हैं। कानून बनाने में भी अब उनकी भूमिका बढ़ती जा रही है। पहले पंचायतों में महिलाएं घूंघट डालकर जाती थीं, काम उनके पति करते थे। आज स्थितियां बदल गई हैं। महिलाएं वोट की ताकत से अपने को ताकतवर बनाने में जुटी हुई हैं। पहले महिलाएं बोलती नहीं थीं, लेकिन अब आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं। स्थितियां बदल गई हैं। आने वाले समय में महिलाओं की कानून बनाने में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी होगी। - इंदु पवार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष-महिला कांग्रेस
विभिन्न लोकसभा चुनावों में महिला वोटिंग
वर्ष वोट (प्रतिशत)
- 1999 28.55
- 2004 29.02
- 2009 33.82
- 2014 48.32
- 2019 43.67 (-4.65)
लोकसभा वार महिला मतदाता
लोकसभा मतदाता
- जम्मू 852796
- उधमपुर 844279
- अनंतनाग 902255
- श्रीनगर 870279
- बारामुला 856677
- कुल 4258127