लद्दाख में लोकसभा की एक ही सीट है और महिला सांसद की बात करें तो आज तक इस सीट पर एक ही महिला एमपी रहीं। वह थीं पार्वती देवी, जिनका पूरा नाम था रानी पार्वती देवी डी वांग्मो। उन्हें ‘रानी माता’ भी पुकारा जाता है। महज पांचवीं पास ‘रानी माता’ छठी लोकसभा (1977-80) की सदस्य रहीं। रानी माता कसे परंपराभंजक के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने पति के मरने के बाद उनके भाई से शादी करने से इनकार कर दिया।
10 जुलाई, 1950 को उनकी शादी लद्दाख केराजा कुंजांग नमग्याल से हुई थी, लेकिन मदिरा सेवन की अधिकता के चलते महज 48 साल की उम्र में वह चल बसे। उस वक्त तक रानी चार बच्चों की मां बन चुकी थी। स्थानीय परंपरा के मुताबिक उन्हें राजा के भाई से शादी करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यही नहीं, वह महज पांचवीं पास थीं, लेकिन उन्होंने लद्दाख के आर्ट एंड कल्चर पर रिसर्च को खूब बढ़ावा दिया। नमग्याल इंस्टीट्यूट आफ रिसर्च आन लद्दाख आर्ट एंड कल्चर यानी एनआईआरएलएसी की स्थापना की।
पार्वती देवी का जन्म एक मई, 1934 को खंगसार पैलेस में हुआ था। वह लाहौल का शाही निवास था। वर्तमान में यह जगह हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में पड़ती है। उनकी सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी का ही नतीजा था कि उन्हें 1958 में लेह की इंप्लीमेंटिंग कमेटी के वेलफेयर एक्सटेंशन प्रोजेक्ट का कन्वीनर बनाया गया।
जब आम चुनाव की घोषणा हुई तो लद्दाख संसदीय क्षेत्र के लिए कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। नेशनल कांफ्रेंस ने भी उन्हें समर्थन दिया। केवल एक स्वतंत्र प्रत्याशी उनके खिलाफ खड़ा हुआ, जिसे उन्होंने 2877 वोट से मात दी। प्रतिद्वंद्वी को 20,253, जबकि रानी माता को 23,130 वोट पड़े। इस तरह वह लद्दाख की पहली महिला सांसद बनी। यह अलग बात है कि हाउस पांच साल की अवधि पूरी नहीं कर सका।