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जम्मू-कश्मीर: एलओसी पर रहने वाले 91 हजार मतदाताओं पर पाकिस्तानी गोलाबारी का साया

Sat, 30 Mar 2019 12:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजय मीनिया, जम्मू

सार

  • इन मतदाताओं के लिए बने हैं 182 पोलिंग स्टेशन, मतदान के दिन गोलाबारी होने पर शिफ्ट होंगे बूथ
  • सबसे ज्यादा पुंछ जिले में खतरा, लगातार डेढ़ महीने से रिहायशी इलाकों पर गिर रहे गोले
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के लिए सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर शांतिपूर्वक चुनाव करने की व्यापक तैयारी कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रदेश के पांच जिले ऐसे हैं, जहां पर चुनाव करना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। हम बात कर रहे हैं लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) से लगे पांच जनपदों की। इसके करीब 91 हजार वोटरों पर पाकिस्तानी गोलाबारी का खतरा मंडरा रहा है। खासकर पुंछ जिले में हर रोज पाकिस्तान की तरफ से रिहायशी इलाकों को टारगेट किया जा रहा है। ऐसे में यहां चुनाव कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है। 
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जानकारी के अनुसार पुंछ जिले में 38 पोलिंग स्टेशन एलओसी के अधीन बने हुए हैं। यहां 14 हजार वोटरों को मतदान करना है। कुपवाड़ा में 74 पोलिंग स्टेशन पर 40 हजार मतदान करेंगे, बारामुला में 19 पोलिंग बूथ पर 8024 मतदाता वोट करेंगे। राजोरी में 51 पोलिंग बूथ पर 33 हजार मतदाता वोट करेंगे। बांदीपोरा में सिर्फ गुरेज का सेक्टर एलओसी के अधीन आता है। बांदीपोरा के जिला उपायुक्त शाबाज मिर्जा का कहना है कि यह इलाका पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ है। उस पार से किसी तरह की गोलाबारी का अंदेशा नहीं हैं। 

लगातार हो रही पुंछ में गोलाबारी
राजोरी और पुंछ जिले में सबसे अधिक तनाव के बीच चुनाव होगा। क्योंकि पिछले डेढ़ महीने में इन जिलों की एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से रिहायशी इलाकों को टारगेट कर निशाना बनाया जा रहा है। इससे इलाकों में तनाव बना हुआ है।
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सभी जगह किए गए हैं बंदोबस्त
पुंछ के जिला उपायुक्त राहुल यादव, राजोरी जिले के उप चुनाव अधिकारी रिजवान असगर, बारामुला जिले के उप चुनाव अधिकारी समीर जान, कुपवाड़ा के जिला उपायुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि इन जिलों में मतदान के दिन गोलाबारी होने की स्थिति पर इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मतदाताओं को दूसरे पोलिंग बूथ पर शिफ्ट किया जाएगा।  

कुपवाड़ा में सेटेलाइट फोन से संपर्क
कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में जिला प्रशासन सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल करेगा। चुनाव के दौरान आपस में संपर्क रखने के लिए ऐसा किया गया है। जिला उपायुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि उन्होंने इसके बारे में चुनाव आयोग से बात की है। इसके अलावा चुनाव कर्मियों के पास वायरलेस उपकरण रहेंगे, जिससे वो आपस में संपर्क रख सकते हैं।  
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