जम्मू। एतिहासिक रघुनाथ बाजार में लोहड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें कलाकारों ने वाद्य यंत्रों के साथ समां बांधा। कोविड प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए सड़क पर अलग-अलग चार स्थानों पर सीमित स्टेज बनाकर कार्यक्रम हुआ। विदेशों की तरह रघुनाथ बाजार में किसी पर्व पर यह नजारा पहली बार देखा गया, जिसमें कलाकार हाथों में वाद्य यंत्र लेकर राहगीरों और यात्रियों का मनोरंजन कर रहे थे। इसके साथ खाद्य स्टालों पर लोगों को लजीज और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका लिया।
पर्यटन निदेशालय की ओर से रघुनाथ बाजार में विभिन्न स्थानों पर संगीत सभा का आयोजन किया गया। इन सीमित सभाओं में कलाकारों ने गिटार, सीतार, संतूर आदि से मंदमस्त करने वाली धुनों को सुनाया। कई वाद्य यंत्रों पर डोगरी गीतों की धुनों को सुनाया जा रहा था। यह सीमित सभाएं मंदिर चौक से लेकर सिटी चौक तक की गईं। इससे पहले मंदिर चौक पर विशाल स्टेज पर कलाकार अपनी प्रस्तुति देते रहे हैं, लेकिन इस बार कोविड के कारण कार्यक्रम में बदलाव किया गया। फूड स्टालों पर लोगों ने पारंपरिक गजरेला, देसी चाय, राजमा चावल, दाल अंबल, कलाड़ी कुलचा, टिकी आदि का स्वाद लिया। वीरवार को लोहड़ी पर भी यह कार्यक्रम जारी रहेंगे।
लोगाें को मिला पारंपरिक टांगे की सवारी का मौका
लोहड़ी पर्व समारोह में पहुंचे राहगीरों और यात्रियों ने पारंपरिक टांगे की सवारी का लुत्फ लिया। आजादी के बाद कनक मंडी में टांगा मशहूर था। लेकिन धीरे धीरे शहर का विस्तार होने पर यह परंपरा विलुप्त हो गई। रघुनाथ बाजार मंदिर चौक से कनक मंडी, राजेंद्र बाजार, रेजीडेंसी रोड से होकर वापस टांगा मंदिर चौक पर पहुंच रहा था। इसमें निशुल्क टांगे की सवारी करवाई गई।