लगातार दिन रात चलने के बाद वह कई बार हिम्मत भी हार गया था। लेकिन रास्ते में ऐसे सैकड़ों श्रमिक भी नजर आए जो अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ कंधों पर सामान लादे पैदल ही मीलों के सफर पर निकले हुए थे। इसी से उसकी हिम्मत और बढ़ गई। लगातार 8 दिनों तक साइकिल पर सफर करने के बाद आखिरकार 16 मई को वह उधमपुर जिले की सीमा पर पंहुच गया।
जहां उसे क्वारंटीन केंद्र भेज दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। 21 मई को उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने बाद वह साइकिल से अपने घर पंहुचा। इसे वह अपने परिवार की दुआओं व आशीष का फल मानता है। जो लगातार कई दिनों तक साइकिल पर सफर करने के बाद वह सुरक्षित अपने परिवार के पास पंहुच पाया है।