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मजदूरों की मजबूरीः रोजी-रोटी की तलाश में आए थे, रोजी मिली नहीं, रोटी पर संकट

Thu, 21 May 2020 02:47 PM IST
प्रशांत कुमार विनय त्रिवेदी, जम्मू
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lockdown in Jammu Kashmir - फोटो : अमर उजाला
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रोजी-रोटी की तलाश में पहली बार घर से दूर आए थे। जम्मू के बाड़ी ब्राह्मणा में एक पीओपी फैक्टरी में साढ़े 13 हजार महीना की बात तय हुई थी। होली के बाद कुछ साथियों के साथ यहां आए। चार दिन काम किया फिर फैक्टरी बंद हो गई। बोले लॉकडाउन हो गया है। पैसा भी नहीं मिला। आज दो महीने से ज्यादा हो गए थे खाली बैठे हुए। अब वापस घर जा रहे हैं। जिस रोजी-रोटी की तलाश में आए थे, वही नसीब नहीं हुई। बाड़ी ब्राह्मणा से पैदल जम्मू रेलवे स्टेशन जाते हुए फर्रूखाबाद निवासी हरिनंदन ने आपबीती सुनाई।

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23 वर्षीय हरिनंदन के साथ 50 से ज्यादा लोग तपती धूप में पैदल ही बाड़ी ब्राह्मणा से जम्मू रेलवे स्टेशन के लिए निकले थे। यहां से रात आठ बजे दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सभी की टिकटें बुक थीं। करीब पांच किलोमीटर चलने के बाद एक पेड़ की छांव में बैठकर एक गहरी सांस ली। इसी दौरान बातचीत में हरिनंदन और उनके साथी गुड्डू ने बताया कि वे फर्रूखाबाद के कायमगंज के रहने वाले हैं।

कुछ साथी पहले से ही जम्मू में काम करते थे सो उनके कहने पर इस बार वे भी यहां काम करने के लिए राजी हो गए। होली के बाद आए थे, सोचा था कुछ कमाकर फिर वापस जाएंगे। लेकिन क्या पता था लॉकडाउन हो जाएगा। कामधंधा बंद होने के बाद कमरे का किराया देना भी मुश्किल हो गया। खाने के लाले हो गए। घर से भी पैसे कब तक मंगाते रहते। फिर सभी ने सोचा पैदल ही चलते हैं, लेकिन थोड़े दिन पहले ट्रेन चलने की बात पता चली तो घर से पैसे मंगाकर ट्रेन का टिकट कटा लिया।
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दिल्ली पहुंच जाएं, फिर सोचेंगे आगे क्या करना है

लॉकडाउन से पहले कायमगंज के ही रहने वाले विमल, श्रवण, नरेश, अजीत भी काम के सिलसिले में जम्मू आए थे। रात की ट्रेन से जम्मू से ट्रेन से दिल्ली पहुंच जाएंगे। इनसे पूछा गया कि दिल्ली से आगे का टिकट है तो नहीं में जवाब मिला। कहा कि पहले दिल्ली पहुंच जाएं, फिर सोचेंगे आगे क्या करना है। कैसे जाना है।

ऑटो वाले ने चार सौ रुपये प्रति व्यक्ति मांगे तो पैदल ही चल पड़े
विकास ने बताया कि वह जम्मू में दो साल से काम करता है। पत्नी और दो बच्चे साथ ही रहते हैं। इधर दो महीने से काम न मिलने से जमापूंजी खत्म हो गई। अब सिर्फ घर जाना है। वहीं जाकर कुछ नया काम शुरू करेंगे। स्टेशन जाने के लिए दोपहर एक ऑटो वाले को फोन किया तो उसने प्रति व्यक्ति चार सौ रुपये मांगे। अब इतने तो दे नहीं सकते थे, इसलिए पैदल ही जा रहे हैं। शाम तक पहुंच जाएंगे।

गर्मी में परेशान हुए बच्चे और महिलाएं
बच्चे और महिलाएं पैदल चलते-चलते तेज धूप में बिलख उठे। धूप से इनकी हालत खराब होने लगी और बच्चे रोने लगे। कुछ देर ठहरने के बाद सभी झोला उठाकर फिर चल दिए।
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