केन्द्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर पर जम्हूरियत को मजबूत करने के लिए स्थानीय इकाइयों के चुनाव जरूरी। लेकिन कुछ ऐसे तत्व हैं जो नहीं करवाना चाहते। वहीं इस बीच डॉ. फारूक ने भी कहा कि अगर चुनाव का फैसला लिया गया है तो उन्हें करवाना चाहिए।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने घाटी में मौजूदा हालातों के बीच पंचायती चुनावों को करवाने की संभावना पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जानी चाहिए कि यदि हमने जमीनी स्तर पर जम्हूरियत और प्रजातंत्र को कायम करना है तो वो तब तक अधूरी रहेगी जबतक स्थानीय इकाइयों के चुनाव न हों। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे तत्व जरूर हैं जिन्होंने पिछले करीब तीन दहाइयों से एक खला (वैक्यूम) में अपनी राजनीती आगे बढ़ने की कला पर महारत पाई है और वह निश्चय ही नहीं चाहेंगे कि चुनाव हों।
उन्होंने यह भी कहा कि इस सबके बीच कश्मीर का आम अवाम आम युवा कितना जागरूक है इसका प्रमाण इस बात से जाहिर है कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार पिछले कुछ वर्षों से सिविल सर्विसस और अन्य परीक्षाओं में मेरिट लिस्ट में कितने आतंवाद प्रभावित क्षेत्रों से युवा उभर कर सामने आते हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह देख कर कभी कभी मैं सोचने पर मजबूर हो जाता हूं कि कश्मीर के युवाओं में देश के अन्य युवाओं की तुलना आकांक्षाएं काफी ज्यादा हैं क्योंकि वह किसी भी अवसर से अपने आपको वंचित नहीं रखना चाहता।
गौरतलब है कि नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी राज्य में पंचायाती चुनावों पर अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र को जिंदा रहना है और उसको जिंदा रखने के लिए एक वोट भी आता है तो वो भी काफी है। उन्होंने कहा कि अगर इन्होने फैसला किया है कि चुनाव करवाने है तो करना चाहिए, हम तैयार हैं।