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'इस तरह तो अशांत ही रहेगा दक्षिण एशिया'

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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बेहतर होने के बिना दक्षिण एशिया में शांति जारी नहीं रह सकती। इसके लिए दोनों के बीच बातचीत की प्रक्रिया का जारी रहना बहुत जरूरी है।
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वह मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के तराल इलाके में जनसभा के दौरान बोल रहीं थी। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिवों की वार्ता के रद्द हो जाने को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

'वाजपेयी के प्रयासों को आगे बढ़ाने में असफल मोदी'

महबूबा ने कहा है कि पीडीपी शांति की हमेशा से हिमायती रही है और भारत और पाकिस्तान के बीच इसके लिए शुरू हुई बातचीत की प्रक्रिया की पक्षधर है।

शांति प्रक्रिया को किसी भी हाल में रोका नहीं जाना चाहिए, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा है कि मोदी सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों को आगे बढ़ाने में असफल रही है।

वाजपेयी ने दक्षिण एशिया की समस्याओं को हल करने के लिए जो प्रयास किए थे उसको निश्चित तौर इस सरकार को आगे ले जाना चाहिए।

कश्मीर की जनता को नई सरकार से उम्मीद

मुफ्ती ने कहा कि दो देशों के बीच पिस रही कश्मीर की जनता को नई सरकार से शांति की बड़ी उम्मीद है। केंद्र में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद उनकी उम्मीदें भी अधिक हुई हैं।

उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की होने वाली बातचीत के रुक जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

उनका कहना था कि पूर्व सरकारों के शासनकाल के दौरान भी ऐसे मौकों पर हुर्रियत नेता पाकिस्तानी नेताओं से मिलते रहे हैं और यह सब अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में भी हुआ है।
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बातचीत को पुन: शुरू करने की अपील

नेशनल कांफ्रेंस ने भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की होने वाली बातचीत के रद्द हो जाने पर अफसोस प्रकट किया है। उसने इसको जम्मू-कश्मीर की जनता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पार्टी ने थम गई बातचीत को पुन: शुरू करने की अपील दोनों मुल्कों से की है।

फारूक कहा कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को दोनों देशों के बीच जारी इस प्रक्रिया को बंद नहीं करना चाहिए था। नेशनल कांफ्रेंस ने सभी बकाया पड़े मसलों को बातचीत के जरिए दूर करने की हमेशा हिमायत की है। उनके बीच होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत से भी उन्होंने काफी उम्मीदें लगाई थी।

जम्मू-कश्मीर तथा दोनों देशों के बीच अन्य मसलों को सुलझाने के लिए बातचीत की प्रक्रिया के जारी रहने की उनकी पार्टी ने हमेशा वकालत की है और इसके रद्द होने से उसको गहरा धक्का लगा है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तानी हुक्मरानों तथा हुर्रियत नेताओं के बीच बातचीत का होना नई बात नहीं है।

ऐसा पहले भी कई बार होता आया है। अलगाववादी नेताओं तथा नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के बीच बैठक को आधार बना कर बातचीत की प्रक्रिया को रोका नहीं जाना चाहिए था।
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