उत्तरी कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकवादी हिंसा में सेना के एक कर्नल, एक मेजर और कुछ सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बारे में पूछे जाने पर ले. जनरल राजू ने कहा, ये हमले किसी भी तरह से आतंकवादियों की बढ़ती उपस्थिति का संकेत नहीं देते हैं। वास्तव में इसके आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती वर्ष 2018 से 2019 के बीच लगभग आधी हो गई, इस साल में और कम हुई है।
उन्होंने इस संख्या का खुलासा नहीं किया कि कितने युवा आतंकी तंजीमों में शामिल हुए। गौरतलब है कि प्रदेश के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कुछ समय पहले कहा था कि 2018 में 218, जबकि 2019 में केवल 139 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए।
इस वर्ष आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस वर्ष अब तक लगभग 35 स्थानीय युवा आतंकवादी समूहों में शामिल हो गए हैं।