लद्दाख की पहाड़ियों में हुई बर्फबारी
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लद्दाख से वापस लौटे 60 के करीब लेक्चरर्स तीन से छह माह से स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू और श्रीनगर के कार्यालयों में रखे गए हैं, जबकि इन शिक्षकों की जरूरत उन स्कूलों में है, जहां से इन्हें लद्दाख भेजा गया था। बच्चों की पढ़ाई के प्रति शिक्षा विभाग कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है। एक तरफ शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग ने शिक्षकों को कार्यालयों में बिठा रखा है।
लद्दाख यूटी बनने के बाद शिक्षकों की कमी थी। इसे पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर से बड़ी संख्या में लेक्चरर्स को एक से तीन साल के लिए लद्दाख भेजा गया था। तय समय अवधि पूरी करने के बाद लेक्चरर्स को लद्दाख यूटी ने वापस भेजा गया है। जम्मू संभाग से लेक्चरर्स तीन से छह महीने से स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू के कार्यालय में हैं। ये लेक्चरर्स सिर्फ हाजिरी लगने तक समिति रह गए हैं।
इनमें डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ और राजौरी जिले के शिक्षक हैं। एक लाख के करीब-करीब वेतन लेने वाले लेक्चरर्स की उचित सेवाएं नहीं ली जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लेक्चरर्स की कमी है। हायर सेकेंडरी स्कूलों में मास्टर्स और टीचर्स, लेक्चरर्स की भूमिका में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग की गंभीरता पर भी प्रश्नचिन्ह उठ रहे हैं। नाम नहीं लिखने पर एक लेक्चरर ने कहा कि वे छह महीने से अपने जिलों से दूर हैं। विभाग उन्हें स्कूलों में तैनाती नहीं दे रहा है।
हमारे कार्यालय में लेक्चरर्स हैं, जिन्हें जल्द स्कूलों में भेजा जाएगा। ये शिक्षक लद्दाख यूटी से वापस आए हैं।
-डॉ. रवि शंकर शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक जम्मू।