एलओसी के साथ सटे गुरेज सेक्टर में किशनगंगा जलविद्युत परियोजना की 110 मेगावाट की क्षमता वाली पहली इकाई के शुरु होने के साथ ही उसकी हैडरेस टनल (एचआरटी) में रिसाव शुरू हो गया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार टनल में 65 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि 64.5 क्यूसेक ही आउटपुट नजर आया।
हायड्रोलिक्स इंजीनियरों और खदान विशेषज्ञों का एक दल सुरंग में हो रहे रिसाव का पता लगाने में जुटा है। रिसाव की सही जगह का पता लगाने और उसकी मरम्मत में कुछ समय लगेगा। फिलहाल एचआरटी को बंद कर दिया गया है। हैडरेस टनल गुरेज में बने बांध से पानी को बांदीपोरा में स्थित पावर हाउस तक पहुंचाती है।
इसमें रिसाव का पता स्थानीय लोगों ने ही लगाया जब उन्होंने पहाड़ों से पानी का रिसाव देखा। इस पर जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और रिसाव वाली जगह का पता लगा उसकी मरम्मत होने तक बांध से पावर हाउस के लिए पानी छोड़ने पर रोक लगा दी।
बांदीपोरा जिले में झेलम नदी की सहायक नदी किशनगंगा पर बन रही एनएचपीसी की इस परियोजना की इस पहली यूनिट से 110 मेगावाट जल विद्युत पैदा करने का लक्ष्य है। इस यूनिट को ग्रिड के साथ तीन मार्च को परीक्षण करने के बाद इसे औपचारिक तौर पर चालू किया गया था।
330 मेगावाट क्षमता वाली कुल तीन यूनिटों वाली इस परियोजना का निर्माण सरकारी उपक्त्रस्म भेल कर रहा है। भेल की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि शेष बची दोनों यूनिट भी अपने निर्माण के आखिरी दौर में हैं। तीनों यूनिटों के चालू होने पर सालाना 1350 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेंगी।
37 मीटर ऊंचे बांध में 24 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए पानी लाकर विद्युत निर्माण करने वाली किशनगंगा परियोजना की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी और उसे वर्ष 2016 में पूरा हो जाना था, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से हेग स्थित कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन (सीओए) में वर्ष 2013 में इसे सिंधु संधि के तहत गैरकानूनी बताते हुए रोकने की अपील करने पर इसे बंद कर दिया गया था। बाद में सीओए की तरफ से भारत के पक्ष में फैसला दिए जाने पर इसका निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया था।