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किसान ही खरीद सकेंगे कृषि योग्य भूमि

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जम्मू। नए कानून से जम्मू-कश्मीर में कृषि योग्य भूमि केवल किसानों को ही बेची जा सकेगी। इस जमीन का स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक या धर्मार्थ इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। यदि सात साल में इस जमीन का इस्तेमाल वांछित उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया तो सरकार जमीन का स्वामित्व वापस ले लेगी। कृषि भूमि को अब गैर कृषि भूमि घोषित कराने के लिए उपायुक्त की अनुमति जरूरी होगी। पहले राजस्व विभाग के मंत्री यह काम करते थे। जबकि गैर कृषि भूमि को अब किसी को भी बेचा जा सकेगा।
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सरकार में पदस्थ उच्चाधिकारियों ने बताया कि नगर निकाय सीमा में कृषि योग्य भूमि को छोड़कर अन्य जमीन किसी को भी बेची या खरीदी जा सकेगी। इसके लिए सरकार के समक्ष विधिवत कारण बताते हुए आवेदन करना होगा कि यह लोकहित में है। स्कूल, अस्पताल, उद्योग या निर्माण इकाई के लिए जमीन खरीदी जा रही है।
बाग स्थापित करने की मिल सकेगी अनुमति
कनवर्सन आफ लैंड एंड एलियेशन आफ आचर्ड्स एक्ट 1975 को खत्म करने का फायदा यह है कि अब किसान बाग स्थापित कर सकते हैं। इस कानून की वजह से चाहने के बाद भी लोग परंपरागत खेती को छोड़कर आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाली बागवानी को अपना नहीं पा रहे थे। बोर्ड आफ रेवन्यू का गठन इस अधिनियम के तहत किया गया है। यह डेवलपमेंट एक्ट की बाहर की जमीन के इस्तेमाल की क्षेत्रीय योजना तैयार करेगा। राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में इस प्रकार का बोर्ड काम कर रहा है।
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काश्तकार 15 साल में बेच सकेगा जमीन
एग्रेगरियन रिफॉर्म्स एक्ट में बदलाव से अब कोई भी काश्तकार 15 साल बाद जमीन को बेच सकेगा। पुराने कानून की वजह से 44 साल तक स्वामित्व के बाद भी काश्तकार जमीन को नहीं बेच सकता था। पुराने कानूनों की वजह से ज्यादातर काश्तकार किसान नहीं माने जाते थे और उन्हें बैंक क्रेडिट, संस्थागत लाभ तथा सरकारी लाभ नहीं मिल पाते थे।
लैंड कोड से कानूनों का दोहराव रुकेगा
लैंड रेवन्यू एक्ट में बदलाव कर लैंड कोड का विकास किया गया है जिससे एक ही तरह के कानूनों का दोहराव न होने पाए। 23 रेवन्यू एक्ट थे जिसमें एक ही तरह के प्रावधान थे। इस वजह से सरकार ने 12 एक्ट खत्म कर दिए। रेवन्यू बोर्ड का गठन किया गया है ताकि जमीन के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए विकास की योजना बनाई जा सके।
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