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दुकानों में धूल फांक रहा लाखों का सामान

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रियासी। देश के साथ ही प्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। इसके साथ ही संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए कोरोना कर्फ्यू जारी है। लेकिन इसके चलते कई कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गर्मी में फ्रिज-कूलर का कारोबार भी उन्हीं में से एक है, जो काफी समय से लॉकडाउन के चलते बंद है। इस कारण लाखों रुपये का सामान बंद दुकानों में धूल फांक रहा है।
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कोरोना कर्फ्यू में इलेक्ट्रानिक का कारोबार करने वाले दुकानदारों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों को पिछले वर्ष भी लगे लॉकडाउन से नुकसान उठाना पड़ा था। इस दफा कोरोना की दूसरी ने कमर तोड़ दी है। बैंकों से लिए गए कर्ज का ब्याज दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। दुकानदार काफी पशोपेश की स्थिति में हैं।
वर्ष की शुरूआत में कोरोना की लहर दोबारा से शुरू होने की कोई आशा नहीं थी, जिस के बाद गर्मी में इस्तेमाल होने वाले सामान की खरीदारी की गई। दुकान के साथ ही शोरूम में भी एयर कंडिश्नर, पंखों, कूलर व फ्रिज को ला कर रखा गया। इस के साथ ही एलईडी, अलमीरा आदि का स्टॉक भी मंगवाया गया। लेकिन कोरोना कर्फ्यू शुरू होते ही दुकानों को बंद कर दिया है। जिन को कब खोला जाएगा इस का कोई पता नहीं है। सरकार व प्रशासन को चाहिए कि ऐसी दुकानों को भी सप्ताह में तीन दिन खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
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- राजेश गुप्ता, दुकानदार
पंखों व कूलर काफी मात्रा में मंगवा लिए थे। इस के साथ ही टेबल फैन व स्टेंडिंग वाले पंखे भी लाए गए हैं। इलेक्ट्रानिक का अन्य सामान भी मंगवाया है। अभी सीजन की पूरी तरह से शुरुआत भी नहीं हुई थी कि कोरोना कर्फ्यू शुरू हो गया। इससे दुकानों के भीतर पड़ा लाखों रुपये का सामान धूल फांक रहा है। अगर जल्द ही दुकानों को नहीं खोला गया, तो गर्मी में इस्तेमाल होने वाले सारे सामान को पैक कर देना पड़ेगा।
- कर्ण शर्मा, दुकानदार
इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान की दुकान को भरने के लिए लाखों रुपये लग जाते हैं। एसी, फ्रिज और कूलर जैसी महंगी चीजों पर एक दुकानदार का काफी खर्चा होता है। दुकान बंद हो जाने के बाद दुकानदारों को मौजूदा समय में नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोरोना कफर्यू के दौरान आने वाले कुछ दिनों तक दुकानों का पूर्ण रूप से खुल पाना तय नहीं लग रहा है। प्रशासन ऐसे दुकानदारों को सप्ताह में कुछ समय के लिए दुकान खोलने की अनुमति दे, ताकि उन की दुकान से ले कर स्टोर तक पड़े सामान की थोड़ी बहुत बिक्री हो सके।
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- विनोद शर्मा, दुकानदार, नई बस्ती
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