विधानसभा चुनाव नतीजे के दो महीने बाद जम्मू-कश्मीर में सत्ता सियासत के नए दौर का आगाज एक मार्च को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की यहां पीएम आवास सात रेसकोर्स रोड पर हुई अहम मुलाकात के बाद राज्य की भावी सत्ता का रोडमैप तय हो गया।
मुफ्ती मोहम्मद सईद रविवार सुबह 11 बजे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी भी सईद के जनरल जोरावर सिंह सभागार में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए इस दिन जम्मू में मौजूद रहेंगे।
शपथ ग्रहण से पूर्व यह जानना जरूरी है कि आने वाली सरकार में पीडीपी-भाजपा में किन मुद्दों पर विवाद हो सकता है। यही वह मुद्दें हैं जिन पर सहमति न बन पाने के कारण रियासत में सरकार गठन का गतिरोध दो माह तक चलता रहा।
अफस्पा
राज्य में फौज को मिले विशेष अधिकार को पीडीपी हटाने पर अड़ी थी तो भाजपा इसे जारी रखने पर अड़ी थी। अब पीडीपी नरम पड़ते हुए इसे राज्य में क्रमबद्ध ढंग से लागू करने की बात कर सकती है, जिसके तहत जहां शांति है वहां से इसे पहले हटाया जाए। इस पर भाजपा राजी हो सकती है।
अनुच्छेद 370, पाक और हुर्रियत से बातचीत
अनुच्छेद 370 हटाना
पीडीपी इसे किसी भी सूरत में हटाने के पक्ष में नहीं है, जिसके तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है। अब भाजपा मौन रहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल सकती है। ऐसा करने से पीडीपी को कोई ऐतराज भी नहीं होगा। पत्रकार वार्ता में अनुच्छेद 370 जैसे विवादास्पद मुद्दों पर सहमति के बारे में बात करने से सईद ने इनकार किया।
इस मामले पर सीधा सा जवाब देते हुए मुफ्ती ने कहा कि इन मुद्दों पर बातचीत नहीं करूंगा। यह न्यूनतम साझा कार्यक्रम के जरिये लिखित रूप में सामने आएगा और देश की पूरी जनता देखेगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 पर पहले ही अपने इरादे जता दिए हैं कि इससे छेड़छाड़ का उसका कोई इरादा नहीं है।
पाक और हुर्रियत से बातचीत
भाजपा इस मामले में काफी सख्त रवैया अपना रही थी, लेकिन अब उसने पाकिस्तान से बातचीत शुरू कर पीडीपी को सकारात्मक संदेश दिया है। कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत से बातचीत पर केंद्र सरकार आगे बढ़ सकती है। पाकिस्तान के साथ वार्ता पर जोर देने की बात करते हुए सईद ने कहा है कि हमें पाकिस्तान से भी बात करनी होगी।
विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन
पीडीपी जम्मू कश्मीर की डेमोग्राफी के हिसाब से विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन के पक्ष में है, जबकि भाजपा इसके पक्ष में नहीं रही है। अब संभावना व्यक्त की जा रही है कि विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन करते वक्त भाजपा की बात रखते हुए कुछ फैसले लिए जाएं।
मारे गए लोगों को मुआवजा
पीडीपी चाहती है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने वालों को मुआवजा मिलना चाहिए। संभावना है कि भाजपा इस मामले में शांत बनी रहे।