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पाक की करतूत से चौपट हो गया खरीफ सीजन

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खरीफ सीजन में किसान कमजोर मानसून से परेशान हैं लेकिन सीमावर्ती इलाकों में भारत पाकिस्तान के बीच के हालात किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। तारबंदी के उस पार हजारों कनाल भूमि अमूमन गोलीबारी की वजह से प्रभावित रहती है।
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इस बार तो पूरा का पूरा खरीफ सीजन ही चौपट हो गया है। तारबंदी के उस पार भारतीय किसानों की बीस हजार कनाल से अधिक भूमि है जिस पर दहशत के मारे इस बार कोई फसल नहीं लग पाई है।

इतना ही नहीं यहां के किसान तो अभी से ही अगले सीजन को लेकर भी शंकाओं में घिर गए हैं। दरअसल भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित जीरो लाइन से कठुआ जिले के 22 गांव सटे हुए हैं। इन गांवों की 20 हजार 353 कनाल 17 मरला भूमि तारबंदी के उस पार है।
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गोलीबारी के चलते खेती नहीं कर सके किसान

सामान्य हालात में भी किसानों को आने जाने के शेड्यूल के तहत ही आवाजाही करनी पड़ती है लेकिन इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान गाहे बगाहे अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीजफायर के मामले रिपोर्ट होते रहे।

पुंछ से लेकर हीरानगर सेक्टर तक कई दफा पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन कर दहशत का माहौल बना दिया। इसकी वजह से स्थानीय किसानों को तारबंदी के पार जाने से मना किया जाता रहा। नतीजतन बड़े पैमाने पर उपजाऊ कृषि भूमि इस बार बिना फसल के ही रह गई।

बॉर्डर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारत भूषण ने बताया कि खरीफ सीजन पूरी तरह से चौपट हो गया है। सीमा के हालात ने किसानों को खेती नहीं करने दी जिससे से कई घरों के लिए तो दो जून की रोटी हासिल करना मुश्किल हो गया है।
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