संघर्ष समिति के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह जमवाल ने पत्रकारों से कहा हमारे अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि बोर्ड 60,000 से अधिक परिवारों की रोटी-रोजी को छीनने पर तुला है। होटल मालिकों, दुकानदारों, घोड़ा चालकों, मजदूरों और परिवहनकर्ताओं ने इस परियोजना के खिलाफ सड़क पर उतर कर विरोध जताया है। हम चाहते हैं कि यह परियोजना रद्द की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू और कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस विरोध में समर्थन दिया है। जमवाल ने स्पष्ट किया हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे, और हम इसे सहन नहीं करेंगे। समिति के नेताओं ने यह घोषणा की कि उनके पांच सदस्य इस मुद्दे पर लिखित आश्वासन प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल करेंगे, जिसमें उपराज्यपाल या गृह मंत्री से यह वादा होगा कि रोपवे परियोजना को रद्द कर दिया जाएगा।
पूर्व मंत्री जुगल किशोर शर्मा, जो इस रैली में शामिल हुए उन्होंने ने भी कहा कि सरकार ने 15 दिसंबर तक इस मुद्दे को हल करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। हम श्राइन बोर्ड के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके गलत विचारित परियोजना के खिलाफ हैं, जो हमारी आजीविका और धार्मिक भावनाओं दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।