बनी और लोहाई मल्हार के इलाके नब्बे के दशक से ही संवेदनशील रहे हैं। स्लीपर सेल से लेकर मददगारों की इलाके में मौजूदगी का फायदा लगभग दो दशक तक आतंकियों ने उठाया है। इसके बाद आतंकियों के लिए बड़े ऑपरेशन चलाए गए और इस इलाके में आतंकियों का सफाया कर दिया गया था।
इलाकों को शांतिपूर्ण बताते हुए और आतंकियों की मौजूदगी खत्म होने के बाद सेना को धीरे-धीरे पूरी तरह से हटा लिया गया था। जिले का पहाड़ी सब डिवीजन बनी समेत बिलावर का लोहाई मल्हार इलाका पिछले साढ़े तीन दशक से बेहद संवेदनशील रहा है।
90 के दशक में अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के बाद आतंकी नदी नालों से होते हुए जिले के पहाड़ी इलाकों में रुकते रहे। इससे इन इलाकों में उन्होंने दहशत भी बना ली। लोआंग इलाके से कई युवाओं को आतंकी राह पर भी ले जाया गया, जिनका समय के साथ सफाया कर दिया गया।
ऐसी ही रणनीति आतंकियों ने लोहाई मल्हार के इलाकों में भी अपनाई, लेकिन बीते एक दशक तक आतंक का सेना ने इन इलाकों में पूरी तरह से सफाया किया। बाकायदा मददगारों के रूप में काम कर रहे स्लीपर सेल भी ध्वस्त किए गए। इसके बाद पाकिस्तान ने रणनीति बदल दी थी।
हाल फिलहाल की आतंकी वारदातों के बाद साफ हो गया है कि पाकिस्तान एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में आतंकी को जिंदा करने की फिराक में है। पाकिस्तान की ओर से जम्मू में आतंकवाद को जिंदा करने की पिछले कुछ दिनों से साजिशें तेज हो गई हैं।
पुंछ, राजोरी, डोडा, रियासी तथा कठुआ में इस प्रकार के हमले हो रहे हैं। दहशतगर्दों की ओर से सुरक्षा बलों के वाहनों, गश्ती दलो, सेना के काफिले को निशाना बनाया जा रहा है जिसमें नागरिकों के साथ ही सुरक्षा बलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई आतंकी हमले हुए
स्थानीय लोगों के अनुसार 90 के दशक की शुरुआत में नई सरथल पुलिस पोस्ट में आतंकियों ने हमला किया था। खुडवा के चुंचली मोड़ पर और लोआंग के सांव नाला बडयाल के पास आईईडी से वाहन भी उड़ाया गया था। वहीं शिरोडी में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी को भी ढेर किया गया था।
लोग बताते हैं कि ढग्गर धमान के इलाके में आतंकी लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। इसी दौर में लोहाई मल्हार में भी कुछ आतंक की राह पकड़कर पाकिस्तान निकल गए। सेना ने कई आतंकियों का सफाया किया तो वहीं इनके बैकअप मॉडयूल को भी ध्वस्त कर दिया गया था।