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Kathua Rape Case: क्राइम ब्रांच ने शुभम सांगड़ा के खिलाफ दायर की चार्जशीट, 24 जनवरी को होगी सुनवाई

Sun, 08 Jan 2023 03:57 PM IST
kumar गुलशन कुमार पीटीआई, जम्मू कश्मीर

सार

कठुआ दुष्कर्म एवं हत्या मामले में आरोपी शुभम सांगड़ा के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चार्ज शीट दायर कर दी है। जम्मू संभाग के जिला कठुआ में गांव रसाना की 8 साल की बच्ची 10 जनवरी 2018 को लापता हो गई थी। लापता होने के 7 दिनों बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली थी।
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कठुआ कांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कठुआ दुष्कर्म एवं हत्या मामले में आरोपी शुभम सांगड़ा के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चार्ज शीट दायर कर दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस मामले में सुनवाई 24 जनवरी को तय की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने बालिग मान कर केस चलाने का दिया था आदेश

16 नवंबर को जम्मू कश्मीर के कठुआ सामूहिक दुष्कर्म कांड 2018 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने  अहम आदेश दिया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कठुआ कांड के आरोपी शुभम सांगड़ा को बालिग मानते हुए उस पर केस चलाया जाए।

शीर्ष कोर्ट ने आरोपी सांग्रा को दुष्कर्म के वक्त नाबालिग मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही निचली अदालत और हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नाबालिग घोषित करने के लिए यदि दस्तावेज न हों तो न्याय हित में चिकित्सकों की राय पर विचार किया जाना चाहिए। आरोपी शुभम सांग्रा के खिलाफ बालिग या वयस्क के रूप में ही मुकदमा चलाया जाए। शीर्ष अदालत ने आरोपी को नाबालिग मानने का निचली अदालत का आदेश खारिज कर दिया। 
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नाबालिग के रूप में सुनवाई पर 2020 में लगाई गई थी रोक

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सात फरवरी 2020 को कठुआ मामले के एक आरोपी पर बाल न्यायालय में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी। जम्मू-कश्मीर सरकार की अपील पर शीर्ष कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी। कठुआ की स्थानीय कोर्ट व जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने भी आरोपी को नाबालिग माना था। जम्मू कश्मीर सरकार ने नगरपालिका और स्कूल रिकॉर्ड के बीच अंतर का हवाला देकर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 

क्या और कब का है मामला

जम्मू संभाग के जिला कठुआ में गांव रसाना की 8 साल की बच्ची 10 जनवरी 2018 को लापता हो गई थी। बच्ची को काफी तलाशने के बाद पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। लापता होने के 7 दिनों बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली।

बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। बच्ची के साथ हुई हैवानियत के विरोध में परिजनों ने प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। 18 जनवरी को एक आरोपी का सुराग लगा और उसे दबोच लिया गया।

22 जनवरी को पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। इस बीच कुछ लोग आरोपियों के पक्ष में खड़े हो गए। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) भी इस आंदोलन में शरीक हो गया। नतीजतन 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई। फिर क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल की।

वकीलों ने इसका विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर का बंद बुलाया और वे कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ से पठानकोट की सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया।

सात आरोपियों के खिलाफ आरोप हो चुके हैं तय

कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई गई। इनमें आरोपी शुभम के खिलाफ अब चार्जशीट पेश की गई है।

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