लोगों के मन में यह बात आएगी कि यदि भाजपा ने सीबीआई जांच की वकालत की होती तो शायद स्थिति कुछ और हो सकती थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा को जम्मू संभाग की दो सीटों पर प्रचंड बहुमत मिला। पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को यहां से 25 सीटें मिलीं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में भाजपा को इस फैसले से उपजे गुस्से का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इस वजह से इसकी काट खोजनी होगी।
वहीं, महबूबा को अपनी बात को साबित करने का पूरा मौका मिल गया कि राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा करना चाहिए। भाजपा पर हमला कर घाटी में वह अपने खिलाफ उपजे असंतोष को दूर करने का प्रयास कर सकती हैं। दरअसल भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर घाटी के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। इसी गुस्से का पार्टी को लोकसभा चुनाव में खामियाजा उठाना पड़ा और उसे घाटी में सभी सीटों से हाथ धोना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनाव में कठुआ कांड मुद्दा बन सकता है। विपक्षी पार्टियां इस पर भाजपा के खिलाफ हमलावर हो सकती हैं। साथ ही चौधरी लाल सिंह का डोगरा स्वाभिमान संगठन भी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगा और लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करेगा कि सत्ता में आने पर सीबीआई जांच कराई जाएगी।
भाजपा को लोगों के गुस्से को डायवर्ट करने की कोशिश करनी होगी
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरिओम का मानना है कि इस फैसले से भाजपा को जबरदस्त घाटा होगा। लोगों में स्वाभाविक रूप से भगवा खेमे के खिलाफ गुस्सा पनपेगा। गुस्सा इस बात को लेकर होगा कि उसने लोगों के सीबीआई जांच की मांग का समर्थन नहीं किया। आने वाले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए उसे इस गुस्से को डायवर्ट करने की कोशिश करनी होगी। इसके लिए अनुच्छेद 370, 35-ए या परिसीमन जैसे मुद्दों पर फैसला लेना होगा।