कश्मीर की जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे अलगाववादी नेता ने जेल से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात कही है। कासिम का कहना है कि, मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। इसके पीछे कासिम का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर को मुस्लिम बहुल बनाए रखने के लिए मुस्लिमों को ज्यादा बच्चे पैदा करने होंगे।
कासिम ने अपनी पार्टी मुस्लिम दीनिमहाज द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में यह बात कही। बयान के मुताबिक, 'हम संपन्न मुसलमानों से एक से ज्यादा शादियां करने और ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करते हैं।' बता दें कि कासिम दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंधराबी के पति हैं।
बयान में उन्होंने, डॉक्टर्स को भी चेतावनी दी है, उन्होंने कहा कि, शरिया के तहत डॉक्टर्स को नसबंदी जैसे ऑपरेशन न करने को कहा है। कासिम का यह बयान पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर में बसाए जाने की योजना के बाद आया है।
'मुस्लिम बहुल दर्जे को बदलने की चाल'
कासिम ने कहा, 'जम्मू कश्मीर में शरणार्थियों को बसाया जाना इस राज्य के मुस्लिम बहुल दर्जे को बदलने की चाल है।' उन्होंने कहा कि कश्मीरी मुसलमान अपने विनाश की भूमिका खुद ही बना रहे हैं। कासिम ने कहा, 'लड़कियों की शादी देर से हो रही है। जिससे उनमें बच्चे पैदा करने की क्षमता कम होती जा रही है।
देर से शादी करने के पीछे जो बहाना दिया जाता है वह यह है कि लड़कियों को शादी से पहले अपने पैरों पर खड़े होना चाहिए।' कासिम ने आगे कहा, 'फिर शादी के बाद, जन्म नियंत्रण नारे जैसे हम दो हमारे दो और पहला अभी नहीं, दूसरा कभी नहीं लगातार इन दंपतियों पर थोपे जा रहे हैं।'
कासिम ने कहा, 1947 के बाद से ही सरकार यह साजिश रच रही है कि रियासत में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक किया जाए। सरकार अब तक इस काम को चुपचाप कर रही थी लेकिन अब इसे खुलेआम किया जा रहा है।
'बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे युवा'
उन्होंने कहा, 'फिर शादी के बाद, जन्म नियंत्रण नारे जैसे 'हम दो हमारे दो' और 'पहला अभी नहीं, दूसरा कभी नहीं' लगातार इन दंपतियों पर थोपे जा रहे हैं। यह आश्चर्यजनक है कि देश में 80 फीसदी हिंदू जनसंख्या होने के बाद भी हिंदू नेता महिलाओं से पांच बच्चों को जन्म देने की अपील कर रहे हैं।'
इससे पहले बीजेपी सांसद साक्षी महाराज और साध्वी निरंजन ज्योति भी हिंदू महिआओं को चार-पांच बच्चे पैदा करने की सलाह दे चुके हैं। कासिम ने कहा, रियासत की सात प्रतिशत युवतियां पोलीसिस्टिक सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। लिहाजा वह बच्चे पैदा नहीं कर सकतीं। वहीं दस प्रतिशत युवा भी बच्चे पैदा करने में असर्मथ हैं।
बीते 25 सालों में इस तरह की बिमारियां तेजी से बढ़ी हैं। कासिम का कहना है कि रियासत में सेना की मौजूदगी से बने तनावपूर्ण माहौल के कराण यह सब हो रहा है।