कश्मीर घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित भी प्रस्तावित अलग टाउनशिप के खिलाफ अलगाववादी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।
शिक्षाविद पंडित विशिन जी, पंडित मोती लाल भट, सामाजिक कार्यकर्ता कुमार जी वांचू, व्यापारी मोती लाल धर और इस समुदाय की कई महिलाओं ने यहां मैसुमा में जुम्मे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन में जेकेएलएफ के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक के साथ आए।
जेकेएलएफ के प्रवक्ता ने कहा, 'यह मार्च लाल चौक की ओर गया और उस दौरान लोग ‘संग संग जीयेंगे और संग संग मरेंगे’ के नारे लगा रहे थे।' कश्मीरी पंडितों ने संवाददाताओं से कहा कि पृथक बस्तियां बनाने की कोई जरूरत या उपयोगिता नहीं है। विशिन जी ने कहा, 'इन बस्तियों से किसी को राजनीतिक लाभ मिल सकता है पंडितों को कभी कोई लाभ नहीं मिल सकता।'
उन्होंने कहा कि केवल बहुसंख्यक समुदाय ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है और अलग होमलैंड बनाने से समुदायों के बीच दूरियां और बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, 'मुसलमानों के मोहल्लों में रह रहे पंडितों को कोई खतरा नहीं है जो आज यहां हमारी उपस्थिति से स्पष्ट होता है।'
मलिक ने कहा कि कश्मीरी पंडित, सिख और अन्य सभी धर्मावलंबी कश्मीरी समाज के अहम हिस्सा हैं और घाटी के मुसलमानों की भांति वे भी इस जमीन के मालिक हैं। उन्होंने कहा, 'हम घाटी में उनकी वापसी का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम अलग बस्तियों के नाम पर इस्राइली प्रकार की बस्तियां बसाकर घृणा की दीवार खड़ी करने की साजिश का विरोध कर रहे हैं।'