वित्तमंत्री अरुण जेटली की तरफ से पेश आम बजट से कश्मीरी पंडितों ने बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाईं थी, लेकिन बजट में कश्मीरी पंडितों को लेकर वित्तमंत्री ने कोई एलान नहीं किया, जिसको लेकर कश्मीरी पंडित बहुत ज्यादा निराश हैं।
अशोक खरलू ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की सबसे बड़ी मांग कश्मीर में पुनर्वास है। इसका बजट में जिक्र नहीं है। सबको उम्मीद थी कि जिस प्रकार केंद्र उनके पुनर्वास पर गंभीर थी, सरकार कोई एलान करेगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
सुनील रैना ने कहा कि राहत राशि में बढ़ोतरी की भी उम्मीद थी। सरकार की तरफ से दस हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से रिलीफ राशि दी जा रही है, जो कि महंगाई के इस दौर में बहुत कम है। उम्मीद थी कि बजट में इसमें बढ़ोतरी होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है।
राकेश पंडिता ने कहा कि कश्मीरी युवाओं को रोजगार की सख्त जरूरत है। केंद्र सरकार की तरफ से पुराने प्रधानमंत्री पैकेज के तहत तीन हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिया जाना बाकी है, लेकिन बजट में वित्तमंत्री ने रोजगार को लेकर कोई एलान नहीं किया है।
विकास ने कहा कि कश्मीरी पंडित हर रोज जरूरतमंद सुविधाओं को तरस रहे हैं। केंद्र सरकार की तरफ से लगाए बैठे संपत्ति के नुकसान का मुआवजे का एलान होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है।