कैंपों में विस्थापन का जीवन यापन कर रहे कश्मीरी पंडितों ने हक की लड़ाई लड़ने के लिए संसद तक कूच करने का ऐलान किया है। उन्होंने घाटी में पंडितों की घर वापसी के लिए राज्य और केंद्र सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया है।
कश्मीर में पंडितों की संपत्तियों पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए कुछ नहीं किया गया। कश्मीरी पंडित युवाओं के रोजगार के लिए सरकार गंभीर नहीं है। प्रधानमंत्री शीघ्र संसदीय कमेटी का गठन करके पंडितों के जमीनी स्तर के हालात का जायजा लें।
वीरवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए आल माइग्रेंट कैंपस कोआर्डिनेशन कमेटी, जगती टाउनशिप के प्रधान देश रतन पंडिता और कोआर्डिनेटर दिलीप पंडिता ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार पंडित समुदाय को अपने अधिकारों के लिए उग्र होने के लिए मजबूर कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाए कि कश्मीर में प्रशासनिक स्तर पर भूमाफिया को समर्थन मिल रहा है। वर्ष 1990 से पंडित समुदाय विस्थापन का जीवन जा रही है, लेकिन अब तक की सरकारों ने उनके दर्द पर मरहम लगाने के लिए कुछ खास नहीं किया है। उन्होंने घाटी में असामाजिक तत्वों द्वारा बीफ मामले को भड़काने के लिए साजिश करार दिया।
ऐसे हालात में पंडितों की घाटी में कभी वापसी मुमकिन नहीं हो सकती। सरकार को ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पंडितों को उनकी संपत्ति वापस देने के लिए सरकार ठोस नीति बनाए। पंडित मेरा घर कहां है, का स्लोगन लेकर अपने संघर्ष को तेज करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाए कि विभिन्न एजेंसियों ने केंद्र को घाटी में पंडितों की जमीनी स्तर की स्थिति की गलत जानकारी दी है। इस दौरान एसके भट्ट, अशोक बाली, संजय टिक्कू, रविंद्र पंडिता, बीएल कौल, प्यारे लाल, दिलीप रैना, दीप भट्ट आदि मौजूद रहे।