कश्मीरी पंडित विस्थापितों के संगठन पनुन कश्मीर ने रियासत जम्मू कश्मीर में 13 जुलाई को मनाए जाने वाले तथाकथित शहीदी दिवस को बदलने की केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से गुहार लगाई है। जम्मू में वीरवार को विभिन्न कश्मीरी पंडित संगठनों की संयुक्त पत्रकार वार्ता में पनुन कश्मीर के प्रधान अश्विनी कुमार चुरंगू ने कहा कि 1931 में कश्मीर में रियासत के महाराजा हरि सिंह के खिलाफ उग्र आंदोलन करते हुए अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और राष्ट्र भक्तों पर जुल्म किए गए।
हिंदुओं की हत्या की गई और उनकी संपत्ति को लूटा गया। उन्होंने कहा कि उग्र आंदोलन के खिलाफ महाराजा की कार्रवाई के विरोध में कश्मीर में तथाकथित एक समुदाय और उससे संबंधित दल शहीदी दिवस मनाते रहे हैं। 1932 से कश्मीरी पंडित बिरादरी 13 जुलाई को काला दिवस के रूप में मनाता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब केंद्र और रियासत में सरकार बदल चुकी है। ऐसे में तथाकथित 13 जुलाई को शहीदी दिवस मनाने और रियासत में अवकाश की प्रथा को बंद करने की जरूरत है, ताकि राष्ट्र भक्त ताकतों का मनोबल बढ़े।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि 13 जुलाई को रियासत में शहीदी दिवस मनाने की जो ऐतिहासिक भूल की गई और जारी है, उसे केंद्र और रियासत सरकार दुरुस्त करे। इस अवसर पर आल स्टेट कश्मीरी पंडित कांफ्रेंस के प्रधान एचएन जत्तू, आल डिप्लेस्ड केपी यूनाइटेड फोरम के चेयरमैन डीएन किसु, पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी के चेयरमैन प्रो. एमएल रैणा, संयुक्त फोरम के प्रवक्ता वीरेंद्र रैणा भी मौजूद रहे।