कश्मीरी पंडितों के लिए अलग सेटेलाइट टाउनशिप को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को हिंसक प्रदर्शन के बाद शनिवार को अलगाववादियों ने कश्मीर बंद रखा। श्रीनगर समेत घाटी के अधिकतर हिस्सों में बंद का खासा असर रहा। सुरक्षा की दृष्टि से भारी फोर्स की तैनाती की गई थी। बंद का आह्वान जेकेएलएफ के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक और कट्टरपंथी हुर्रियत नेता एवं हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी ने किया था।
अन्य अलगाववादी संगठनों तथा कश्मीर बार एसोसिएशन ने भी बंद का समर्थन किया। शनिवार को सभी स्कूल, कालेज और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर यातायात न के बराबर देखने को मिला। यातायात प्रभावित रहने के कारण सरकारी दफ्तरों में हाजिरी कम रही। घाटी में श्रीनगर शहर समेत सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की भारी तैनाती की गई थी ताकि हर स्थिति से निपटा जा सके।
हालांकि, बंद के दौरान इस बार श्रीनगर के पुराने शहर में प्रतिबंध देखने को नहीं मिले, लेकिन मायसूमा और गौकदल जैसे अतिसंवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों ने कोई ढील नहीं दी। सड़कों पर कंटीले तार लगाए थे। पुलिस के एक आला अधिकारी के अनुसार घाटी के लगभग हर जिले में स्थिति शांतिपूर्ण रही।
जेकेएलएफ का अनशन 18 से
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक ने शनिवार को बताया कि कश्मीरी पंडितों को अलग टाउनशिप में बसाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के विरोध में 18 अप्रैल से 30 घंटे का अनशन किया जाएगा। साथ ही 19 अप्रैल को आयोजित सेमिनार में घाटी के प्रमुख बुद्धिजीवी, लेखक, विद्वान, विरोधी संस्थाओं के नेता, सिविल सोसाइटी के सदस्य, व्यवसायी और वकील भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि वह स्वयं 18 से 19 अप्रैल की सुबह तक अनशन पर बैठेंगे।