मौसम के बदलते मिजाज कश्मीर के पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले सालों में यहां के खूबसूरत ग्लेशियर, झरने, झीलें और दरिया तेजी से लुप्त होने लगेंगे और अंतत: अस्तित्व खो देंगे।
कश्मीर विश्वविद्यालय में हुए एक शोध ने इस खतरे से आगाह किया है। बदलाव का असर अब से ही देखने को मिल रहा है। इस बार न के बराबर हुई बर्फबारी के कारण कश्मीर के कारोबारी ही नहीं सैलानी भी निराश हैं। पर्यटकों की तादाद में काफी कमी हुई है। इसका सीधा असर यहां की अर्थ व्यवस्था पर पड़ा है।
यहां के सुहावने मौसम, दिलकश नजारों, ग्लेशियरों और नदी-नालों के कारण कश्मीर को धरती का जन्नत कहा जाता है। कश्मीर विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों द्वारा किया गया शोध इस बदलाव को घाटी के पर्यावरण के लिए हानिकारक मानता है।