रियासत सरकार कश्मीर घाटी को बॉलीवुड की पसंदीदा स्थल बनाने में जुटी है। कश्मीर को जहां ‘आल सीजन टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ बनाने की कवायद शुरू की गई है, वहीं गुलमर्ग को ‘भारत का दावोस’ बनाने की कोशिश है।
यदि ऐसा होता है कि पूरी दुनिया कश्मीर की हसीन वादियों से फिर से रूबरू होगी। लेकिन अफसोस यह है कि कश्मीर में बड़े पर्दे पर खुद कश्मीर वाले इसे नहीं देख पाएंगे। मौजूदा समय में घाटी में एक भी सिनेमा नहीं है।
घाटी के लोगों को इसका मलाल रहता है कि अपने ही कश्मीर को बड़े पर्दे पर नहीं देख सकते। वर्ष 1989 से पहले कश्मीर में 13 सिनेमा हाल थे। जब आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो ये बंद हो गए।
इसके बाद से लगातार कश्मीर में सिनेमा हाल को शुरू करने के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। दो साल पहले जब घाटी में हैदर फिल्म की शूटिंग हुई तो कश्मीर के लोगों को फिल्म न देखने का मलाल रहा।
आतंकवाद के दौरान आतंकियों ने सिनेमा घरों को निशाना बनाया। घाटी में सिनेमा पर एक तरह से आतंकियों ने प्रतिबंध लगा दिया।