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मानसिक रूप से कमजोर हो चुके हैं बाढ़ पीड़ित

Sun, 14 Sep 2014 09:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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घाटी की बाढ़ से निकलकर जम्मू पहुंचने वाले मरीजों का जीएमसी और अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में पहुंचना जारी है। इमरजेंसी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बाढ़ से निकलकर आ रहे अधिकांश लोग शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हैं। इनमें कई मरीज ऐसे हैं, जिन्हें नियमित इलाज की जरूरत है।
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हाईवे खुलने के साथ घाटी से ऐसे मरीजों की यकायक तादाद बढ़ने की उम्मीद है। इसको देखते हुए जीएमसी में डिजास्टर प्लान सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतन पाल के अनुसार मरीजों की संख्या पर ही चिकित्सा सुविधाओं को विकसित करना निर्भर करेगा। इमरजेंसी में अतिरिक्त स्टाफ के साथ पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलाजी यूनिट में घाटी के कई किडनी मरीजों का डायलसिस हो चुका है और रोजाना इनकी संख्या बढ़ रही है। विभाग के एचओडी डा. एसके बाली के अनुसार श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में किडनी रोगों से ग्रस्त करीब छह सौ मरीज नियमित डायलसिस करवा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने पर ऐसे मरीज जीएमसी और सुपर स्पेशलिटी पहुंचेंगे।
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घाटी से लाए गए कई मरीजों की हालत काफी खराब है। श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में अस्पतालों के पानी में डूब जाने से ऐसे मरीजों को चिकित्सा नहीं मिल पाई है। विभाग की ओर से अतिरिक्त उपकरणों की मांग की गई है, जिससे मरीजों का लोड बढ़ने पर सभी को उचित चिकित्सा दी जा सके।

शहर के एसएमजीएस, गांधीनगर और सरवाल अस्पताल में भी ऐसे मरीज पहुंचे हैं। इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से कई गर्भवती महिलाओं का प्रसव करवाया गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अस्पतालों में बाढ़ पीड़ितों की चिकित्सा के लिए उचित इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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