पाक सेना ने बनाया था निशाना
अपने मिशन को अंजाम देने के लिए कई बार उन्होंने लाइन ऑफ कंट्रोल के बिल्कुल नजदीक से भी उड़ान भरीं, ताकि पाकिस्तानी सैनिकों की पोजिशंस का पता लगाया जा सके। ऐसी ही वक्त में एक बार जब गुंजन उड़ान भरने के लिए कारगिल हवाई पट्टी से टेकऑफ की तैयारी कर रही थीं, तभी पाकिस्तानी सेना ने कंधे से दागी जाने वाली एक मिसाइल से उनके चॉपर को टारगेट किया। मिसाइल उनके चॉपर से लगते-लगते बची और पीछे पहाड़ी से टकरा कर फट गई। गुंजन और विद्या के लिए यह सामने मौत दिखने जैसा अनुभव था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर दूसरे भारतीय सैनिक की तरह, वे भी उस दिन अपने देश के लिए जान देने के लिए तैयार थीं।
घायल सैनिकों ने बढ़ाया जज्बा
सेल्फ डिफेंस के नाम पर गुंजन के पास केवल एक इंसास राइफल और एक रिवॉल्वर ही थी, जिसका इस्तेमाल उन्हें तब करना था, अगर उनका चॉपर दुश्मन के इलाके में क्रेश हो जाता। इस दौरान उनका बस केवल एक ही मकसद था कि कैसे घायल सैनिकों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए और यही घायल सैनिक उनके इस जज्बे को भी कायम रखे हुए थे। गुंजन का मानना है कि एक हेलीकॉप्टर के पायलट के लिए इससे अच्छा अहसास क्या हो सकता है कि जंग के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचा रही हैं और किसी की जान बचा रही हैं।
शौर्य चक्र से किया सम्मानित
हालांकि बतौर चॉपर पायलट उनके साहस और दिलेरी को देखते हुए उन्हें शौर्य वीर चक्र से भी नवाजा गया। सेना से ऐसा सम्मान प्राप्त करने वाली वह पहली महिला भी बन गईं। गुंजन और श्रीविद्या को कभी भी लड़ाकू विमान उड़ाने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने उन लोगों के लिए रास्ता तय किया, जो पुरुषों के साथ कंधां मिला कर अपने देश के लिए लड़ना चाहते हैं। गुंजन और श्रीविद्या ने उस समय दिलेरी दिखाई जब आमतौर पर यह आम भारतीय मानसिकता है कि सेना केवल पुरुषों के लिए है।