संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल। जनजातीय गौरव वर्षा पखवाड़े के राष्ट्रव्यापी आयोजन के अंतर्गत भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र कारगिल में प्रथम जनजातीय खेल सम्मेलन शुक्रवार को संपन्न हुआ। जनजातीय एथलीटों ने ताइक्वांडो, मुक्केबाजी और खो-खो में चमक बिखेरी।
चिकटन गांव ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में जनजातीय खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह कार्यक्रम जनजातीय अनुसंधान संस्थान और लद्दाख विश्वविद्यालय की ओर से जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। प्रतिस्पर्धी खेलों के माध्यम से जनजातीय युवाओं को प्रोत्साहित और सशक्त बनाने के लिए आयोजित इस सम्मेलन में ताइक्वांडो और मुक्केबाजी के मुकाबले करवाए गए।
इसमें 200 से अधिक एथलीटों ने प्रभावशाली भागीदारी की जिनमें भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र, कारगिल में लद्दाख पुलिस की टीमें और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, चिकटन में खो-खो की टीमें शामिल थीं। इस आयोजन में लद्दाख भर से उभरते आदिवासी खिलाड़ी एक साथ आए और उन्हें अपने कौशल, अनुशासन और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान किया। उप पुलिस अधीक्षक टुंडुप दोरजे ने प्रतिभागियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी खेल सम्मेलन जैसे आयोजन हमारे आदिवासी युवाओं के लिए एक प्रेरक शक्ति का काम करते हैं। सम्मेलन का समापन खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों को पदक, स्मृति चिन्ह और ट्रॉफी प्रदान करने के साथ हुआ। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज (लड़के) शुजात अली और सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज (लड़कियां) कुलसुम, जबकि सर्वश्रेष्ठ ताइक्वांडो खिलाड़ी (लड़कियां) आसिया बानो और सर्वश्रेष्ठ ताइक्वांडो खिलाड़ी (लड़के) तजम्मुल हुसैन शामिल थे।