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Jammu News: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर खौड़ में पार्टी को बर्बाद करने के लगाए आरोप

Tue, 02 Dec 2025 02:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
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फोटो ज्यौडियां सेखौड़ में कांग्रेस की बैठक के दौरान एक दूसरे पर आरोप लगाते पार्टी के कार्यकर्त
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ज्यौड़ियां। खौड़ क्षेत्र में कांग्रेस की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक रविवार को उस समय विवादों और हंगामे का केंद्र बन गई जब बैठक के बीच ही पार्टी कार्यकर्ताओं में अचानक कहासुनी शुरू हो गई। बैठक पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद के नेतृत्व में हो रही थी और इस बैठक में विशेष रूप से दिल्ली से भेजे गए कांग्रेस हाईकमान के ऑब्जर्वर मोहन मार्केम भी मौजूद थे, जो क्षेत्रीय गतिविधियों की समीक्षा करने आए थे।
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बैठक का माहौल तब बिगड़ गया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामेश वर्मा और सुमित शर्मा ने अचानक बैठक के बीच में ही पूर्व चेयरमैन नगर पंचायत खौड़ अशोक कुमार पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। रामेश वर्मा ने आरोप लगाया कि अशोक कुमार “तारा चंद के क्षेत्र में शिव की छवि खराब कर रहे हैं, पार्टी लाइन के खिलाफ काम कर रहे हैं और संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन आरोपों के साथ ही दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते बैठक का शांत माहौल तनावपूर्ण बहस में बदल गया।कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा मानो बैठक पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। आवाज़ें ऊँची हो गईं, कार्यकर्ताओं में आरोप–प्रत्यारोप शुरू हो गए और वातावरण गर्माता चला गया।स्थिति को देखते हुए तारा चंद ने तुरंत हस्तक्षेप किया, दोनों पक्षों को शांत रहने की सलाह दी और मामले को समझदारी से संभालने की अपील की।
दिल्ली से आए ऑब्जर्वर मोहन मार्केम ने भी कार्यकर्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि संगठन में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर सहन नहीं की जाएगी।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस घटना की चर्चा तेज हो गई है जिसमें भले ही रमेश वर्मा का पलड़ा भारी है पर भूतपूर्व उपमुख्यमंत्री का उपहास कांग्रेस की बदनामी चारों ओर गूंज रही है। कई लोगों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस में आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आने लगी है, जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि यह आंतरिक लोकतंत्र का हिस्सा है और पार्टी इन मुद्दों पर विचार करेगी। जिसे खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे का स्वरूप माना जा रहा है। चाहे कुछ भी कहा जाए लेकिन यह घटना कांग्रेस की स्थानीय इकाई के भीतर मौजूद असंतोष और मतभेदों को उजागर करती है, जिसे सुधारना अब पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
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