जम्मू। जम्मू-कश्मीर खेल परिषद के एक फैसले से जम्मू के 150 दिव्यांग (मूक, बधिर और नेत्रहीन) जूडो खिलाड़ियों का भविष्य अधर में फंस गया। इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले एकमात्र कोच सूरज भान का जम्मू से हटाकर जिला परीक्षण केंद्र उधमपुर में भेज दिया गया। हैरानी की बात है कि उधमपुर में इस खेल से जुड़ा एक भी दिव्यांग खिलाड़ी नहीं है। जम्मू में 10 दिन से प्रशिक्षण बंद है।
बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर में सीनियर जूडो कोच में सूरज भान एकमात्र कोच हैं जो सामान्य बच्चों के साथ-साथ विशेष दिव्यांग बच्चों को जूडो सिखाते हैं। उनके मार्गदर्शन में हाल ही में चार नेत्रहीन जूडो खिलाड़ियों ने विश्व नेत्रहीन जूडो चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया था।
विश्व चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व करने वाले जूडो खिलाड़ी अंशुमान शर्मा ने कहा कि खेल परिषद ने बिना सोचे-समझे हमारे कोच का तबादला कर दिया। अब हमें प्रशिक्षण कौन देगा? तबादला करने पर इन खिलाड़ियों का प्रशिक्षण जारी रखने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
अंशुमान ने बताया कि उन्होंने 2017 में जूडो खेलना शुरू किया था। कोच हमें नेत्रहीन स्कूल में सिखाने आते थे। जब वह एमए स्टेडियम के इंडोर कक्ष के प्रबंधक बने तो वहां प्रशिक्षण लेना आसान हुआ। हमें सुबह और शाम छह घंटे परीक्षण मिलता था। अब 10 दिनों से प्रशिक्षण बंद है। सिखाने वाला कोई कोच नहीं है।
उन्होंने बताया कि नेत्रहीन और मूक-बधिर खिलाड़ियों के जूडो में नियम और तकनीक भी अलग है। सामान्य खिलाड़ियों को जूडो सिखाने वाला कोच विशेष खिलाड़ियों को नहीं सिखा सकता।
दिव्यांग जूडो खिलाड़ी अबरार, सोमराज, शहनाज, अदीबा और भूमिका ने कहा कि वे 20 मई के बाद से स्टेडियम में नहीं गए हैं। सरकार एक तरफ इन विशेष खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा और अनुकूल वातावरण देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर वास्तविकता अलग है।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर खेल परिषद के कर्मचारियों ने कहा कि तबादला एक विभागीय प्रक्रिया है, लेकिन विशेष खिलाड़ियों के हितों को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाए कि परिषद ने तबादलों में वरिष्ठता सूची का पालन नहीं किया है। वरिष्ठ कोचों को दरकिनार किया गया है।
मेरे संज्ञान में यह मामला आया है। खिलाड़ियों के हितों को प्रभावित नहीं होंगे। इस मामलों को हम देख रहे हैं। -सतीश शर्मा, खेल मंत्री