रियासत जम्मू कश्मीर में पन बिजली उत्पादन की क्षमता 20 हजार मेगावाट होने के बावजूद भी रियासत का अपना पन बिजली उत्पादन मात्र 758.70 मेगावाट है।
आलम तो यह है कि 6000 करोड़ की सालाना बिजली खरीदकर भी उपभोक्ताओं की मांग को पूरा नहीं किया जा सका है। बिजली की मांग और उपलब्धता में एक हजार मेगावाट से भी ज्यादा के अंतर के चलते अघोषित कटौती से उपभोक्ताओं को गर्मी हो या फिर सर्दी जूझना ही पड़ता है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन ने रियासत में पन बिजली उत्पादन की क्षमता को 20 हजार मेगावाट आंका हुआ है। जबकि रियासत में बिजली की मांग वर्तमान में 2600 से 2800 मेगावाट के बीच ही है।
अगर क्षमता का आधा भी हासिल हो जाए तो रियासत में बिजली उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली के अलावा बिजली बेचकर रियासती सरकार पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकती है और विकास कार्य तेजी से हो सकते है।
16वें आल इंडिया पावर सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक रियासत में बिजली की मांग बढ़कर 3500 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। ऐसे में अगर पन बिजली उत्पादन की क्षमता को हासिल करने की तरफ तेजी से कदम न बढ़ाये गए तो हालात आने वाले सालों में मुश्किल भरे होते जाएंगे।