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जम्मू कश्मीर: पूर्व एडीजीपी, पूर्व मंडलायुक्त समेत अन्य वीआईपी की सुरक्षा में कटौती

Mon, 08 Jul 2024 06:01 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर

सार

उपराज्यपाल प्रशासन ने कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं और पूर्व न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के अलावा कुछ पत्रकारों की सुरक्षा वापस ले ली है।
 
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सुरक्षाबल - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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श्रीनगर जिला पुलिस ने इस साल मार्च में वीआईपी और सेवानिवृत्त अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात 130 व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) और 57 वीआईपी के आवासीय गार्ड को वापस ले लिया है। इसके लिए राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) के फैसले का हवाला दिया है। इनमें पूर्व आईपीएस अधिकारी मुनीर खान और उनके सेवानिवृत्त भाई पूर्व मंडलायुक्त कश्मीर बशीर खान के अलावा राजनेता, पूर्व पुलिस अधिकारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश और मीडियाकर्मी शामिल हैं।

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प्रशासन की तरफ से सुरक्षा में कटौती के फैसले ने इन लोगों में गुस्सा और चिंता पैदा कर दी है। इन नौकरशाहों और राजनेताओं का तर्क है कि कश्मीर में उनका जीवन असुरक्षित हो गया है।

एसएसपी श्रीनगर की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि 30 मार्च 2024 को राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) द्वारा लिए गए निर्णय के तहत विभिन्न संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा को वापस ले लिया गया है। 2 जुलाई को जारी आदेश में कहा है, जिला श्रीनगर के सभी जोनल एसएसपी अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र से उपरोक्त सीएपीएफ/सशस्त्र गार्डों की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करेंगे। इसी तरह डीवाईएसपी डीएआर डीपीएल श्रीनगर सभी पीएसओ/गार्डों को तुरंत वापस बुलाएंगे।
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इनमें से 28 भाजपा, अपनी पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और अन्य छोटे दलों से जुड़े राजनेता, पांच पूर्व न्यायाधीश, छह सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी और सेवानिवृत्त बशीर खान सहित तीन नौकरशाह हैं। आदेश के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व एडीजीपी मुनीर खान, जिनके पास जेड+ प्लस सुरक्षा कवर है, की सुरक्षा में बड़ी कटौती देखी गई है। उनके पीएसओ और आवासीय गार्ड वापस ले लिए गए हैं। उनके भाई बशीर खान की भी जेड+ प्लस श्रेणी की सुरक्षा में बड़ी कटौती देखी गई है। बशीर खान डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था, तब मुनीर खान एडीजीपी कानून और व्यवस्था थे। बशीर खान डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मुनीर खान को जम्मू और कश्मीर सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। जिन सेवानिवृत्त अधिकारियों की सुरक्षा वापस ले ली गई है, उनमें से एक ने प्रशासन के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा, हम क्या कर सकते हैं, यह सरकार का फैसला है, लेकिन यह फैसला हमें असुरक्षित बना देगा। फैसले की समीक्षा की जानी चाहिए।

अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पर भाजपा की बी-टीम होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन इनके नेताओं की सुरक्षा में भी बड़ी कटौती देखी गई है। श्रीनगर के पूर्व मेयर और अपनी पार्टी के युवा अध्यक्ष जुनैद मट्टू (जेड सुरक्षा) और अपनी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष अशरफ मीर पार्टी के उन सात नेताओं में शामिल हैं जिनकी सुरक्षा वापस ले ली गई है। मीर ने श्रीनगर में हालिया संसदीय चुनाव लड़ा और नेकां के आगा रुहुल्ला मेहदी के खिलाफ अपनी जमानत गंवा दी। जिन राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें सत्तारूढ़ भाजपा के चार सदस्य शामिल हैं।

सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेताओं की भी सुरक्षा हटा ली है और अंसारी परिवार के तीन नेताओं सहित चार नेताओं को इसका खमियाजा भुगतना पड़ा है। सूची में इमरान अंसारी को छोड़ दिया गया है, हालांकि उनके चाचा आबिद अंसारी की सुरक्षा में कटौती की गई है।

सोशल मीडिया पेजों पर जानकारी का प्रसार संवेदनशील : मट्टू

पूर्व मेयर और अपनी पार्टी के नेता जुनैद अजीम मट्टू ने कहा, उनकी सुरक्षा में भी कटौती की गई है, जो ठीक है। कहा कि उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। प्रशासन ने ऐसा करके जिम्मेदार निर्णय लिया होगा। उन्होंने कहा, हालांकि यह देखना बहुत आश्चर्यजनक है कि संरक्षित व्यक्तियों को कोई भी औपचारिक या अनौपचारिक संचार करने से पहले उनके सुरक्षा प्रोटोकॉल, विवरण और व्यवस्था (उनके आवास सहित) को सोशल मीडिया पेजों और मीडिया व्हाट्सएप समूहों पर प्रसारित किया जा रहा है। ये बहुत संवेदनशील विवरण हैं और इस जानकारी को सुरक्षा कारणों से बेहद गोपनीय रखा जाना चाहिए था। यही मेरी एकमात्र चिंता और आपत्ति है। यह भी चिंताजनक है कि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर की गई सुरक्षा योजनाएं और तैनाती लीक हो गई है। मुझे उम्मीद है कि इसकी आंतरिक जांच की जाएगी।

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