फाइलों के गुम होने का मामला प्रकाश में आने के बाद जेडीए में हड़कंप मच गया। जिम्मेदार गुपचुप तरीके से डुप्लीकेट फाइल तैयार करवाने में लग गए। पुराने दस्तावेज गुम होने और नई फाइल बनने की जानकारी होने पर कुछ अलॉटियों ने आपत्ति जताई तो मामले का खुलासा हुआ। नये दस्तावेज तैयार करने का मामला 2021 तक चला। आवंटियों के विरोध के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो जेडीए ने जांच के नाम पर खानापूर्ति करके पूरे मामले की जानकारी शासन को भेज दी। इस जांच में न तो किसी को दोषी ठहराया गया और न ही किसी की जिम्मेदारी तय की गई, जिसकी आमजन में खूब चर्चा हो रही है।
जेडीए की जांच में ऐसे गुम हुई फाइलें
साल- गुम फाइलों की संख्या
- 2014- 53 फाइलें गायब
- 2015- 42 फाइलें गायब
- 2016- 55 फाइलें गायब
- 2017- 67 फाइलें गायब
- 2018- 47 फाइलें गायब
- 2019- 49 फाइलें गायब
नोट- अभी 37 फाइलों की जानकारी जेडीए एकत्रित कर रहा है।
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जेडीए जिम्मेदारों पर उठते बड़े सवाल
- आवंटियों के प्लाटों और आवासों की फाइल रिकॉर्ड सेक्शन से कैसे गुम हो गई, क्योंकि कि यहां दर्जनों की संख्या में अलमारियां हैं, जिसकी चाबी जिम्मेदार कर्मचारी के पास रहती है।
- रिकार्ड रूम के बाद आवंटन दस्तावेज रखने के लिए डिवीजन एक-दो और तीन हैं, इन डिवीजन के अलग अलग इंजार्ज है, आिखर ये इंचार्ज क्या करते रहे।
- रिकार्ड रूम के तीनों डिवीजन की रखवाली में करीब 200 कर्मचारी तैनात हैं, बड़ा सवाल है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद यहां से दस्तावेज कहां चले गए।
- साल दर साल फाइलें और दस्तावेज गायब होते रहे और विभागीय जिम्मेदार अनजान बने रहे, यह कैसे संभव हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जेडीए के द्वारा पूरे मामले की जांच कराई गई थी, जिसके बाद कुछ आवंटियों को डुप्लीकेट दस्तावेज भी दिए थे। अब पूरा मामला शासन के पास है। शासन स्तर से मामले की चल रही है। -साहिल कुमार, सचिव जेडीए