जम्मू जिला उपायुक्त की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार जम्मू में एक साल से रह रहे लोग मतदान कर सकेंगे। इसे लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस आदेश को डोगरा संस्कृति को पहला झटका बताया है। वहीं, नेशनल कांफ्रेंस का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में 25 लाख गैर-स्थानीय मतदाताओं को जोड़ने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए जारी नए आदेश से यह स्पष्ट है कि जम्मू में भारत सरकार की औपनिवेशिक बसाने वाली परियोजना शुरू हो गई है। उन्होंने डोगरा संस्कृति, पहचान, रोजगार और व्यवसाय को पहला झटका दिया है।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के बीच धार्मिक और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने के भाजपा के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए। क्योंकि चाहे वह कश्मीरी हो या डोगरा, हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा तभी संभव होगी जब हम सामूहिक लड़ाई लड़ेंगे।'
वहीं, नेशनल कांफ्रेंस ने कहा कि भाजपा चुनावों से 'डरती' है और जानती है कि वह बुरी तरह हारेगी। नेकां का कहना है कि सरकार जम्मू-कश्मीर में 25 लाख गैर-स्थानीय मतदाताओं को जोड़ने की अपनी योजना के साथ आगे बढ़ रही है। इस कदम का विरोध करते हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों को इन साजिशों को मतदान में पराजित करना होगा।
आदेश में क्या लिखा है
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को जम्मू जिला प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया गया है कि जम्मू में रहने वाले किसी नागरिक के पास अपनी रिहाइश साबित करने के लिए अगर कोई निर्धारित दस्तावेज नहीं है, तब भी वह मतदाता बनकर अपने वोट का इस्तेमाल कर सकता है।
आदेश में तहसीलदारों को आवास प्रमाण पत्र जारी करने के अधिकार दिए गए हैं, जो मौके पर जाकर उनकी रियाइशी की जांच करेंगे और इसके आधार पर व्यक्ति मतदाता बन सकेगा। आदेश में कहा गया है कि प्रमाण पत्र जारी करने का लक्ष्य उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल करना है, जो रजिस्ट्रेशन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
जम्मू में एक साल से रह रहे लोग बन सकेंगे मतदाता, आदेश जारी
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