जम्मू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पहले चरण के चुनाव का प्रचार शनिवार को थम गया। आखिरी घंटों में छात्र नेता ताकत झोंक रहे हैं। उनका फोकस अब डोर-टू-डोर कैंपेन पर है। वह घर-घर जाकर छात्र मतदाताओं से संपर्क की तैयारी में जुट गए हैं। छात्र संगठनों की दूसरी राजनीतिक विंग भी इनकी मदद को आगे हैं। वह भी पफलेट, पोस्टर के जरिए प्रचार कर पूरा हाथ बंटा रहे हैं। हालांकि शनिवार और रविवार को कैंपस बंद रहने से उनकी दिक्कत जरूर बढ़ गई है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के लिए छात्र संघ प्रचार का जिम्मा संभाल रहे पीयूष खजूरिया का कहना है कि अब डोर-टू-डोर कैंपेन पर ही फोकस है। आखिरी समय की मेहनत ही साबित करेगी कि विजेता कौन होगा। उनके मुताबिक अगर रविवार इस बीच न पड़ता तो बेहतर रहता। कम-से-कम सभी कैंपस में मिल जाते और उन तक बात पहुंचानी और आसान हो जाती।
वह छात्राओं की सुरक्षा के लिए साथ ही ला स्कूल में मूट कोर्ट की स्थापना को बड़ा मुद्दा मान रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुंदन के मुताबिक हॉस्टलों में प्रचार पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। कैंपस बंद होने की वजह से दिक्कत हो रही है। वह भी पूरी तैयारी की बात दोहरा रहे हैं। हालांकि वह यह भी आरोप लगाते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा सहयोग संगठन को नहीं मिल रहा।