बसोहली की चित्रकारी, भद्रवाह के राजमा, सेब का जैम, कड़म का आचार, कुलगाम के मुश्कबदजी चावल, कश्मीरी सूट, अखरोट, बादाम, गुजरात के आभूषण, घर की सजावट के साजो-सामान सहित अन्य स्टॉल से जम्मू विश्वविद्यालय का जनरल जोरावर सिंह सभागार का मैदान सज चुका है। यहां पर जम्मू व्यापार मेला आयोजित किया गया है।
जम्मू और कश्मीर व्यापार संवर्धन संगठन (जेकेटीपीओ) की ओर से 31 जनवरी से 4 फरवरी तक आयोजित मेले के दूसरे विद्यार्थी व जम्मू शहर के लोग खरीदारी करने के लिए पहुंचे। मेले में 110 से अधिक स्टॉल हैं। इनमें फूड स्टाल भी हैं, जहां पारंपरिक व्यंजनों को खूब पसंद किया जा रहा है।
अपने घर को और सुंदर बनाने के लिए हथकरघा, हस्तशिल्प के उत्पाद उपलब्ध हैं। साथ ही बागवानी, कृषि, फैशन और सहायक उपकरण, यात्रा और पर्यटन, भवन निर्माण सामग्री, फर्नीचर के स्टाल भी हैं। मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। आयोजकों का कहना है कि जम्मू के दुकानदार इस मेले में आने वाले कारीगरों और शिल्पकारों से सीधे संपर्क कर सकते हैं और टाई-अप व्यवस्था के माध्यम से जम्मू में अपने विशेष उत्पादों को खरीद और बेच सकते हैं। इसमें प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर और शिल्पकार अपने हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करने के लिए पहुंचे हैं।
उद्योग, वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने कहा कि यह मेला जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। यह प्रदर्शनी स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, कृषि उत्पादक संगठन को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, ग्राहकों की प्राथमिकताओं को समझने, नए मार्केटिंग कौशल सीखने के साथ-साथ ग्राहक आधार विकसित करने का उपयुक्त अवसर प्रदान करेगा।
जम्मू शहर को मिलेगी विशिष्ट पहचान
मेले का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के विविध आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित करना है, जो व्यवसायों और निवेशकों के लिए एक सतत मंच तैयार करेगा, और जम्मू शहर को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा।