बिजली, पेयजल की मांग और उपलब्धता में लगातार अंतर बढ़ने के चलते अब की बार गर्मियों में बिजली और पेयजल संकट गहरा सकता है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत में बिजली की मांग साल 2014 की गर्मियों में 2600 मेगावाट से बढ़कर करीब 2700 मेगावाट तक हो चुकी है। ऐसा ही हाल पेयजल का भी है।
जम्मू जिले में ही पेयजल आपूर्ति की मांग 46 मिलियन गैलन डेली को भी पार कर चुकी है, जबकि सभी स्रोतों से पीएचई विभाग करीब 43 एमजीडी पानी ही उपलब्ध करवा पा रहा है। बिजली गुल होने पर पानी सप्लाई का सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। पीएचई का पूरा सिस्टम पंपिंग पर निर्भर करता है।
पंपिंग तभी हो पाती है, जब बिजली उपलब्ध रहे। रियासत में बिजली की उपलब्धता ज्यादातर पन बिजली पर निर्भर है। पनबिजली का उत्पादन सर्दियों में दरियाओं और नदियों में जल स्तर कम होने की वजह से एक तिहाई तक पहुंच चुका है। लेह में फुकटल नदी में पहाड़ का मलवा गिरने से निम्मो बाजगो पन बिजली परियोजना का उत्पादन भी गिर चुका है।
उत्तरी ग्रिड से रोजाना 600 से 800 मेगावाट तक बिजली खरीदकर रियासत में सर्दियों में गुजारा किया जा रहा है। गर्मियों में ओवरलोड बढ़ने से बिजली की अघोषित कटौती तो बढ़ेगी ही। इसके अलावा ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं।
संभाग में करीब 45000 बिजली ट्रांसफार्मरों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति हो रही है, लेकिन बिजली ट्रांसफार्मर बैंकों में स्टैंड बाय ट्रांसफार्मरों की भारी कमी की वजह से बिजली संकट गहराने की आशंका बनी रहती है।