उत्तराखंड में जारी 38वें राष्ट्रीय खेलों में बिना पदक जीते लौट जम्मू-कश्मीर की तैराकी टीम
एमए स्टेडियम से छह साल से बन रहा पूल, प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तैराकी किताबें पढ़कर नहीं, पानी में कूदकर ही सीखी जा सकती है। यह कहावत जम्मू-कश्मीर के खेल विभाग पर लागू होती नहीं दिख रही। तैराकी की सुविधा न होने से टीम उत्तराखंड में जारी 38वें राष्ट्रीय खेलों में बिना पदक जीते लौट आई। प्रदर्शन न कर पाने का कारण जम्मू में ऑल वेदर स्विमिंग पूल न होना है। छह साल से इसके लिए निर्माण जारी है, पूल सूखा है, पदक डूब रहे हैं और खिलाड़ी किताबों में तकनीकें सीख सपने में तैर रहे हैं।
उत्तराखंड में जारी राष्ट्रीय खेलों में जम्मू-कश्मीर की तैराकी टीम शीर्ष दस में भी जगह नहीं बना पाई। खराब प्रदर्शन का बड़ा कारण पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिलना माना जा रहा है। कुछ खिलाड़ी अपने स्तर पर निजी स्कूलों के पूल में तैयारी करते हैं, लेकिन ये पूल मानकों के अनुरूप नहीं होते। वर्ष 2019 में सरकार ने एमए स्टेडियम में मौजूदा स्विमिंग पूल को ऑल वेदर बनाने का फैसला किया था। निर्माण भी शुरू हुआ। पहले चरण में 3.50 करोड़ और दूसरे में 4.93 करोड़ रुपये जारी हुए। प्रोजेक्ट की कुल लागत आठ करोड़ से अधिक हो गई।
फिल्टर रूम और समतलीकरण का काम बाकी
वर्तमान में दो स्विमिंग पूल तैयार हैं और छत डाली जा चुकी है। दोनों में टाइलिंग, फिल्टर रूम के अलावा सामने वाले हिस्से का समतलीकरण और मुख्य गेट का निर्माण होना बाकी है। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर जारी हुआ, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
सुविधा मिलने में अभी लगेंगे आठ से नौ माह
स्विमिंग पूल का निर्माण पूरा होने में आठ से नौ माह का वक्त लगेगा। स्पोर्ट्स काउंसिल के अभियंता के अनुसार तीन बार टेंडर जारी किए, लेकिन कोई एजेंसी आगे नहीं आई। अभी जारी किए टेंडर में दो एजेंसियों ने भाग लिया है। आठ या नौ फरवरी को टेंडर खुलेगा। अभी ज्यादातर कार्य मैकेनिकल से जुड़ा बचा है।
टीम के खराब प्रदर्शन का कारण प्रशिक्षण नहीं मिलना है। हमारे पास स्विमिंग पूल नहीं है। एमए स्टेडियम में स्विमिंग पूल 2019 से बन रहा है। स्पोर्ट्स काउंसिल को चाहिए की जल्द पूल का निर्माण पूरा करे।
- रमनदीप सिंह सूदन, अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर स्विमिंग एसोसिएशन