उन्होंने बताया कि आरोपी ने कबूल किया कि पाकिस्तानी हैंडलर मोहम्मद आमिन उर्फ खुबैब के कहने पर उसने स्टिकी बम आईईडी प्लांट की थी। खुबैब डोडा के कठावा ठाठरी का रहने वाला है, जो इन दिनों पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रह रहा है। उसके पिता मोहम्मद इशहाक सोहिल लश्कर का प्रशिक्षित आतंकी था जिसे 2003 को मार गिराया गया था। रमजान सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तानी हैंडलर खुबैब के साथ लगातार संपर्क में था। उसे एक स्टिकी बम सलाथिया चौक पर लगाने और एक को भविष्य में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश मिला था। उसकी निशानदेही पर एक स्टिकी बम बरामद किया गया।
एडीजीपी ने बताया कि रमजान को स्टिकी बम ब्लास्ट की घटना को अंजाम देने के बाद 30 हजार रुपये मिले थे जो उसके जेके बैंक खाते में 23 मार्च को डाले गए थे। यह राशि डोडा के मोटला देसा निवासी खुर्शीद अहमद ने खुबैब के निर्देश पर डाले थे। इस पर खुर्शीद को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसका साला बिलाल अहमद बट लश्कर का प्रशिक्षित आतंकी है जो 2002 से पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। खुबैब का वित्तीय मामला खुर्शीद ही देखता है।
बेलीचराना से दो स्टिकी बम आईईडी मिले थे
एडीजीपी ने बताया कि तीसरा आरोपी भद्रवाह के धानी निवासी निसार अहमद खान प्रशिक्षित आतंकी है और वह 2001 से 2006 तक लश्कर के साथ डोडा जिला में सक्रिय था। उसने खुबैब के निर्देश पर दो बार स्टिकी बम आईईडी लिया था। एक दिसंबर 2021 व दूसरा जनवरी 2022 में जम्मू के बेलीचराना से लिया था। उसे मोबाइल पर लोकेशन और चित्र भेजे गए थे। उसके खुलासे पर एक स्टिकी बम आईईडी भद्रवाह के जंगल क्षेत्र खुरसारी से बरामद किया गया। कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।