रणजी ट्रॉफी : फिर टूटा जेएंडके का सपना, अंतिम दिन जीत के लिए आठ विकेट की थी जरूरत
तमाम प्रयासों के बावजूद गेंदबाज झटक पाए मात्र छह विकेट
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर रणजी ट्रॉफी में सेमीफाइनल की दौड़ से फिर बाहर हो गया है। केरल के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में मिली एक रन की बढ़त के आधार पर केरल ने सेमीफाइनल का टिकट कटवा लिया। पांच साल बाद क्वार्टरफाइनल में पहुंची जम्मू-कश्मीर टीम का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना एक बार फिर टूट गया।
पुणे के एमसीए क्रिकेट स्टेडियम, गहुंजे में क्वार्टरफाइनल मैच के अंतिम दिन केरल को जीत के लिए 299 रन चाहिए थे, जबकि जम्मू-कश्मीर को आठ विकेट की जरूरत थी। तीन विकेट पर 100 रन से आगे खेलते हुए केरल के कप्तान सचिन बेबी और ए चंद्रन ने धैर्य का प्रदर्शन किया। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 259 गेंदों में सिर्फ 58 रन ही जोड़े, लेकिन इससे जम्मू-कश्मीर के जीत के इरादे कमजोर हो गए।
जम्मू-कश्मीर को दिन की पहली विकेट साहिल लोत्रा ने दिलवाई। उन्होंने ए चंद्रन (48) और कप्तान सचिन बेबी (48) को चलता किया। आबिद मुश्ताक ने जलाल सेक्सेना (18) और एए सरवटे (08) को सस्ते में चलता कर जम्मू-कश्मीर की मैच में वापसी करवाई। अब जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए सिर्फ चार विकेट चाहिए थे, लेकिन बल्लेबाजी करने उतरे सलमान नजीर (44) और मोहम्मद अजहरुद्दीन (67) ने जम्मू-कश्मीर की जीत के सामने दीवार बनकर खड़े रहे।
दोनों ने गेंदबाजों को हावी होने का कोई भी मौका नहीं दिया और सातवें विकेट के लिए नाबाद 115 रन की साझेदारी की। दिन का खेल खत्म होने तक केरल ने छह विकेट 295 रन बनाते हुए मुकाबला ड्रॉ करवाया। पहली पारी में एक रन के बढ़त केे आधार पर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई किया। बता दे की इससे पहले जम्मू-कश्मीर 2014 और 2020 में भी क्वार्टरफाइनल में पहुंचा था, लेकिन हार मिली थी।
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जेएंडके ने केरल को दिया था 399 का लक्ष्य
क्वार्टरफाइनल मैच से पहले जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा रन नहीं बना पा रहे थे। पहले बल्लेबाजी करते हुए जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 280 रन बनाए थे। इसके जवाब में केरल ने पहली पारी में 281 बनाकर एक रन की बढ़त ली थी। सलमान नजीर ने (112) शतकीय पारी खेली और अंतिम विकेट के लिए बसिल थंपी के साथ 81 रन की साझेदारी की। उस समय जम्मू-कश्मीर को आभास नहीं था एक रन की बढ़त उनके सेमीफाइनल में पहुंचने के सपने को तोड़ देगी। दूसरे पारी में जम्मू-कश्मीर कप्तान पारस डोगरा के 132 रन के दम पर 399 रन बनाए।
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रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर को एक भी हार नहीं मिली
रणजी ट्राॅफी में इस बार जम्मू-कश्मीर का सफर काफी अच्छा रहा। एलिट ग्रुप में जम्मू-कश्मीर 35 अंकों के साथ टॉप पर रहा। कुल खेले सात मैच में से जम्मू-कश्मीर ने पांच में जीत हासिल की, जबकि दो ड्रॉ रहे। अपने इस सफर में जम्मू-कश्मीर मुंबई को दस साल रणजी में हराया। बड़ौदा को मात देकर क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने आठ मैच में 44 विकेट लिए और रणजी ट्रॉफी के इस सत्र में सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में वो दूसरे स्थान पर थे।
पारस डोगरा का अंतिम मैच, शतक लगाकर ली विदाई
हिमाचल प्रदेश के पारस डोगरा इस सत्र में जम्मू-कश्मीर के लिए बतौर कप्तान खेले। उनकी कप्तानी में जम्मू-कश्मीर ने शानदार प्रदर्शन किया। रणजी ट्रॉफी में टीम ने पांच साल बाद क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। ग्रुप मैच और नॉकआउट में कप्तान का बल्ला खामोश रहा, लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शतक लगाकर केरल के सामने जीत के लिए बड़ा स्कोर खड़ा किया। हिमाचल के कांगड़ा जिले के पालमपुर निवासी क्रिकेटर पारस डोगरा ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। रणजी में 32 शतक लगाने वाले पारस ने जम्मू-कश्मीर के लिए बतौर कप्तान अपना अंतिम मैच खेला। उन्होंने क्रिकेट के सभी फार्मेट में सन्यास लेने की पहले ही घोषणा कर दी थी। 2001 में पारस डोगरा ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने अपने क्रिकेट कॅरिअर में हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और जम्मू कश्मीर की टीमों से रणजी, वनडे और टी-20 मैच खेले हैं। 5 जनवरी 2025 को विशाखापटनम में चंडीगढ़ के खिलाफ विजय हजारे का मैच खेलने के बाद पारस डोगरा ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।